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विश्व ध्यान दिवस - 21 दिसम्बर

 


विश्व ध्यान दिवस -एक विश्व, एक हृदय

21 दिसम्बर, 2025 को 20 मिनट के निर्देशित हार्टफुलनेस ध्यान के लिए विश्व भर में लाखों लोगों से जुड़ें।

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विश्व ध्यान दिवस पर दुनिया के सभी धर्मों  व् विचारों के  लाखों लोग अपने घर से ही  यू ट्यूब के माध्यम से एक साथ जुड़ रहे हैं , आप भी इस में सम्मलित होने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर रजिस्टर करें व् विश्व में शांति व्  स्वास्थ्य लाभ को प्रसारित करने के महत कार्य में अपना योगदान दें। 

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आधुनिक जीवनशैली में भागदौड़, तनाव, अनियमित दिनचर्या और मानसिक दबाव ने मनुष्य के शारीरिक स्वास्थ्य पर गहरा नकारात्मक प्रभाव डाला है। ऐसे समय में ध्यान (Meditation) एक प्राचीन लेकिन अत्यंत प्रभावी साधना के रूप में उभरकर सामने आया है। ध्यान केवल मानसिक शांति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संपूर्ण शारीरिक स्वास्थ्य को भी सुदृढ़ करता है। वैज्ञानिक शोधों ने सिद्ध किया है कि नियमित ध्यान अभ्यास से शरीर की अनेक प्रणालियाँ बेहतर ढंग से कार्य करने लगती हैं।

ध्यान का अर्थ और स्वरूप

ध्यान —  मन को वर्तमान क्षण में स्थिर करने की प्रक्रिया है, जिसमें व्यक्ति अपनी श्वास, मंत्र, ध्वनि या किसी विचार के माध्यम से  ध्यान  करता है। योग, विपश्यना, मंत्र ध्यान, माइंडफुलनेस जैसे विभिन्न प्रकार के ध्यान आज विश्वभर में अपनाए जा रहे हैं। इनका उद्देश्य मन और शरीर के बीच संतुलन स्थापित करना है।

तनाव और रक्तचाप पर प्रभाव

ध्यान का सबसे प्रमुख शारीरिक लाभ तनाव में कमी है। तनाव शरीर में कोर्टिसोल जैसे हानिकारक हार्मोन की मात्रा बढ़ा देता है, जिससे उच्च रक्तचाप, हृदय रोग और सिरदर्द जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। नियमित ध्यान करने से कोर्टिसोल का स्तर नियंत्रित रहता है, जिससे रक्तचाप सामान्य बना रहता है। कई अध्ययनों में यह पाया गया है कि ध्यान करने वाले व्यक्तियों में हाइपरटेंशन की समस्या अपेक्षाकृत कम होती है।

हृदय स्वास्थ्य में सुधार

ध्यान हृदय स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी है। यह हृदय गति को नियंत्रित करता है और रक्त प्रवाह को सुचारु बनाता है। ध्यान के दौरान शरीर “रिलैक्सेशन रिस्पॉन्स” में चला जाता है, जिससे धमनियाँ फैलती हैं और हृदय पर दबाव कम होता है। इससे दिल के दौरे, एथेरोस्क्लेरोसिस और अन्य हृदय संबंधी रोगों का खतरा घटता है।

प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाना

ध्यान का नियमित अभ्यास शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यून सिस्टम) को सशक्त करता है। तनाव और नकारात्मक भावनाएँ प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर करती हैं, जबकि ध्यान शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। शोध बताते हैं कि ध्यान करने वाले व्यक्तियों में एंटीबॉडी का स्तर अधिक पाया जाता है, जिससे वे संक्रमण और बीमारियों से बेहतर ढंग से लड़ पाते हैं।

पाचन तंत्र पर सकारात्मक प्रभाव

तनाव का सीधा प्रभाव पाचन तंत्र पर पड़ता है, जिससे गैस, अपच, एसिडिटी और इरिटेबल बाउल सिंड्रोम जैसी समस्याएँ होती हैं। ध्यान पैरासिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम को सक्रिय करता है, जो पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है। शांत मन के कारण भोजन का पाचन सुचारु रूप से होता है और भूख व पोषक तत्वों का अवशोषण संतुलित रहता है।

नींद की गुणवत्ता में सुधार

अनिद्रा आज एक आम समस्या बन चुकी है। अत्यधिक सोच, चिंता और तनाव के कारण व्यक्ति को गहरी नींद नहीं मिल पाती। ध्यान मस्तिष्क को शांत कर नींद लाने में सहायक होता है। ध्यान करने से मेलाटोनिन हार्मोन का स्राव बढ़ता है, जो नींद के लिए आवश्यक है। परिणामस्वरूप नींद की गुणवत्ता सुधरती है और व्यक्ति सुबह तरोताजा महसूस करता है।

दर्द प्रबंधन में सहायक

ध्यान का उपयोग अब दर्द प्रबंधन (Pain Management) में भी किया जा रहा है। यह शरीर की दर्द सहने की क्षमता को बढ़ाता है। माइंडफुलनेस मेडिटेशन विशेष रूप से पुराने दर्द, माइग्रेन, पीठ दर्द और गठिया जैसी समस्याओं में लाभकारी सिद्ध हुआ है। ध्यान दर्द के प्रति व्यक्ति की प्रतिक्रिया को बदल देता है, जिससे दर्द की तीव्रता कम महसूस होती है।

हार्मोनल संतुलन और चयापचय

ध्यान शरीर के हार्मोनल संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है। यह थायरॉइड, एड्रिनल और अन्य ग्रंथियों के कार्य को संतुलित करता है। इसके अतिरिक्त ध्यान चयापचय (Metabolism) को बेहतर बनाता है, जिससे वजन नियंत्रण में सहायता मिलती है। मोटापा, मधुमेह और हार्मोनल असंतुलन जैसी समस्याओं में ध्यान सहायक भूमिका निभाता है।

मांसपेशियों और शारीरिक ऊर्जा पर प्रभाव

ध्यान के दौरान शरीर की मांसपेशियाँ शिथिल होती हैं, जिससे जकड़न और थकान कम होती है। यह शरीर में ऊर्जा के प्रवाह को संतुलित करता है। नियमित ध्यान करने वाले लोग अधिक सक्रिय, ऊर्जावान और सहनशील महसूस करते हैं। उनकी कार्यक्षमता और सहनशक्ति में भी वृद्धि होती है।

पुरातत्वविदों के अनुसार, ध्यान 5,000 ईसा पूर्व से चला आ रहा है, और इस अभ्यास का संबंध प्राचीन मिस्र और चीन, यहूदी धर्म, हिंदू धर्म, जैन धर्म, सिख धर्म और बौद्ध धर्म के साथ-साथ ईसाई धर्म और इस्लाम से भी है। अनुमान है कि दुनिया भर में 200 से 500 मिलियन लोग ध्यान करते हैं।अलग-अलग कल्चर में धार्मिक, योग और सेक्युलर परंपराओं से जुड़ी, मेडिटेशन हजारों साल से की जा रही है।टेक्नोलॉजी ने मेडिटेशन तक पहुंच को और भी आसान बना दिया है, ऐप्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की मदद से लोग कहीं भी और कभी भी इसका अभ्यास कर सकते हैं।मेडिटेशन कई तरह के होते हैं, जिनमें से हर एक शांति, स्पष्टता और संतुलन पाने के लिए अनोखे तरीके बताता है। व्यक्तिगत फायदों के अलावा, मेडिटेशन सहानुभूति, सहयोग और साझा मकसद की भावना को बढ़ावा देता है, जिससे सामूहिक भलाई में मदद मिलती है। अपनी सार्वभौमिकता के लिए मशहूर, मेडिटेशन दुनिया के सभी क्षेत्रों में सभी उम्र, बैकग्राउंड और लाइफस्टाइल के लोगों द्वारा किया जाता है।

विश्व ध्यान दिवस

ध्यान और उसके फ़ायदों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए, संयुक्त राष्ट्र ने 21 दिसंबर को विश्व ध्यान दिवस घोषित किया, और सभी को शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के उच्चतम संभव स्तर का आनंद लेने के अधिकार को याद दिलाया। संयुक्त राष्ट्र में मेडिटेशन की एक खास जगह है, जिसका उदाहरण न्यूयॉर्क में UN हेडक्वार्टर में मेडिटेशन रूम है।सेक्रेटरी-जनरल डैग हैमरस्कजोल्ड की गाइडेंस में 1952 में खोला गया, यह "शांति का कमरा" दुनिया भर में शांति हासिल करने में शांति और आत्म-मंथन की ज़रूरी भूमिका को दिखाता है।

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दिसम्बर 21, 2025 - 8:00 PM (IST)


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