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कान्हा शांति वनम, हैदराबाद: एक शानदार मेडिटेशन रिसोर्ट

  हैदराबाद से लगभग 50 किलोमीटर दूर स्थित कान्हा शांति वनम भारत के सबसे प्रतिष्ठित और सुव्यवस्थित मेडिटेशन रिसोर्ट्स में से एक है। यह स्थान न केवल आध्यात्मिक साधना का केंद्र है, बल्कि आधुनिक जीवनशैली से थके हुए मनुष्य के लिए शांति, संतुलन और आत्मिक जागरण का एक आदर्श आश्रय भी है। यह केंद्र हार्टफुलनेस आंदोलन से संबद्ध है और विश्वप्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु पूज्य दाजी (कमलेश डी. पटेल) के मार्गदर्शन में संचालित होता है। कान्हा शांति वनम लगभग 1,400 एकड़ में फैला हुआ एक हरित, शांत और सुव्यवस्थित परिसर है। यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता—हरी-भरी पहाड़ियाँ, खुले मैदान, वृक्षों की कतारें और स्वच्छ वातावरण—मन को तुरंत शांत कर देती हैं। इस स्थान की योजना इस प्रकार की गई है कि साधक प्रकृति के सान्निध्य में रहकर ध्यान और आत्मचिंतन कर सके। यहाँ का वातावरण पूर्णतः प्रदूषण-मुक्त और अनुशासित है, जो ध्यान साधना के लिए अत्यंत अनुकूल माना जाता है।कान्हा शांति वनम का वातावरण अत्यंत शांत, हरित और प्राकृतिक है। विस्तृत भू-भाग में फैले इस परिसर में घने वृक्ष, सुंदर उद्यान, जल-संरचनाएँ और खुले ध्यान स्थल हैं, ज...

रीढ़ का दर्द बीमारी नहीं है | कमर दर्द का असली कारण जो किसी ने नहीं बताया

  कमर का दर्द, रीढ़ की जकड़न, बार-बार होने वाली पीठ की समस्या… क्या आपने कभी सोचा है कि दवा लेने के बाद भी दर्द क्यों लौट आता है? यह वीडियो किसी चमत्कार, व्यायाम या झूठे वादे की बात नहीं करता। यह वीडियो उस सच्चाई को खोलता है जिसे लोग सालों से गलत समझते आए हैं। इस वीडियो में आप जानेंगे: रीढ़ वास्तव में क्या है दर्द हड्डी में क्यों नहीं होता नसों का तनाव कैसे कमर को कठोर बना देता है सूजन शरीर की दुश्मन क्यों नहीं होती और क्यों असली समाधान बाहर नहीं, जीवन की लय में छिपा होता है यह कोई धार्मिक भाषण नहीं है। यह कोई ध्यान या चेतना की चर्चा नहीं है। यह शरीर की वास्तविक प्रक्रिया को समझने की ईमानदार कोशिश है। अगर आप: बार-बार कमर दर्द से परेशान हैं रिपोर्ट सामान्य होने के बाद भी दर्द झेल रहे हैं या सिर्फ शरीर को समझना चाहते हैं तो यह वीडियो आपके लिए है। वीडियो को अंत तक देखें, क्योंकि यह दर्द से लड़ना नहीं, दर्द को समझना सिखाता है।

सर्दियों में गलती से भी मत कर देना ये गलतियां, वरना खराब हो जाएगी किडनी की हेल्थ

  सर्दियों के मौसम में कुछ स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बढ़ जाती हैं. खासकर किडनी के मरीजों के लिए यह मौसम परेशानियों से जुड़ा रहता है. किडनी हमारे शरीर के लिए अहम अंग है. यह शरीर से हानिकारक तत्व और अतिरिक्त पानी बाहर निकालती है और हमारे खून को साफ रखती है. सर्दियों में कम पानी पीना, खराब खानपान, या शरीर की कम एक्टिविटी से किडनी पर ज्यादा दबाव पड़ सकता है और यह कई समस्याओं का कारण बन सकता है. ऐसे में सर्दियों के दौरान किडनी की देखभाल करना बेहद जरूरी है. सर्दियों में क्या होती है दिक्कत? सर्दियों में सबसे बड़ी समस्या यह होती है कि लोग कम पानी पीते हैं. ठंड के कारण अक्सर प्यास कम लगती है और लोग सोचते हैं कि पानी पीने की जरूरत नहीं है, लेकिन यह सोच बिल्कुल गलत है. किडनी को ठीक तरह से काम करने के लिए शरीर में पर्याप्त पानी होना जरूरी है. इसलिए चाहे प्यास लगे या न लगे, हर 1 से 2 घंटे में थोड़ा-थोड़ा पानी पीना चाहिए. पानी पीने से पेशाब का रंग हल्का पीला रहता है, जो शरीर में पानी की सही मात्रा का संकेत देता है. इससे किडनी पर बोझ नहीं पड़ता और स्टोन बनने का खतरा भी कम होता है. यह ऑप्शन सब...

सर्दियों में डाइजेशन से लेकर इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए ये 5 फूड्स खाएं

  सीजनल सब्जियों और फलों को खाने की सलाह तो हर कोई देता है। खासतौर पर ठंड के मौसम में जब डाइजेशन कमजोर हो जाता है और इम्यूनिटी वीक हो जाती है। जिसकी वजह से सर्दी, जुकाम, खांसी परेशान करती है। वहीं ओवरऑल हेल्थ पर भी सर्दियों का निगेटिव असर दिखने लगता है। ऐसे में आशलोक अस्पताल के डॉक्टर आलोक चोपड़ा ने हेल्दी रहने के लिए कुछ फूड्स की लिस्ट शेयर की है। जिन्हें सर्दियों के सीजन में खाना बेस्ट ऑप्शन है। सरसों का साग सर्दियों के सीजन में सरसों का साग जरूर खाएं। विटामिन ए, सी और के से भरपूर होने के साथ ही इसमे हाई फाइबर कंटेट होता है। जो डाइजेशन को स्मूद करने के साथ ही कॉन्सटिपेशन को कंट्रोल करता है और साथ ही हार्ट हेल्थ को सपोर्ट करता है। कच्ची हल्दी कच्ची फ्रेश हल्दी मार्केट में आसानी से सर्दियों में मिल जाती है। इसे अपनी रोजाना की डाइट में शामिल करें। हल्दी में पावरफुल एंटीऑक्सीडेंट होते हैं और साथ ही नेचुरल एंटी इंफ्लामेटरी भी होती है। स्किन के साथ ही इम्यूनिटी को सपोर्ट करती है और रोजाना हल्दी वाली ड्रिंक इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करेगी। खजूर सर्दियों में होने वाली थकान को दूर करने के ...

विपरीत परिस्थितियों में मन को शांत और स्थिर रखने की शक्ति - तितिक्षा

  तितिक्षा मय जीवन कैसे जीयें??? --------------------------- तितिक्षा (Titiksha) का अर्थ है -   सहनशीलता, धीरज और मानसिक दृढ़ता ,  विशेषकर सुख-दुख, सर्दी-गर्मी, मान-अपमान जैसे द्वंद्वों को बिना विलाप या शिकायत के सहन करने की क्षमता;  यह बाहरी परिस्थितियों के बावजूद मन को शांत और स्थिर रखने की आध्यात्मिक शक्ति है, जो आध्यात्मिक उन्नति के लिए आवश्यक मानी जाती है।   मुख्य बिंदु: सहनशक्ति:   यह सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक सहनशक्ति भी है, जो कष्टों के प्रति प्रतिक्रिया किए बिना उन्हें स्वीकार करती है।   द्वंद्वों को सहना:   इसमें सर्दी, गर्मी, सुख, दुख, लाभ, हानि, मान, अपमान जैसे जीवन के सभी विरोधाभासी अनुभवों को स्वीकार करना शामिल है।   आध्यात्मिक महत्व:   आदि शंकराचार्य और स्वामी विवेकानंद जैसे विचारकों ने इसे आत्म-ज्ञान और योग के मार्ग में एक महत्वपूर्ण योग्यता बताया है, जो मन को बाहरी प्रभावों से मुक्त करती है।   शांत प्रतिक्रिया:   तितिक्षा का मतलब उदासीनता नहीं, बल्कि यह सिखाती है कि मन को आंतरिक रूप से शांत ...

ध्यान का शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रभाव

  “ध्यान का शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रभाव”  पर उपरोक्त वीडियो देखें  ध्यान का शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रभाव आधुनिक जीवनशैली में भागदौड़, तनाव, अनियमित दिनचर्या और मानसिक दबाव ने मनुष्य के शारीरिक स्वास्थ्य पर गहरा नकारात्मक प्रभाव डाला है। ऐसे समय में ध्यान (Meditation) एक प्राचीन लेकिन अत्यंत प्रभावी साधना के रूप में उभरकर सामने आया है। ध्यान केवल मानसिक शांति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संपूर्ण शारीरिक स्वास्थ्य को भी सुदृढ़ करता है। वैज्ञानिक शोधों ने सिद्ध किया है कि नियमित ध्यान अभ्यास से शरीर की अनेक प्रणालियाँ बेहतर ढंग से कार्य करने लगती हैं। ध्यान का अर्थ और स्वरूप ध्यान —  मन को वर्तमान क्षण में स्थिर करने की प्रक्रिया है, जिसमें व्यक्ति अपनी श्वास, मंत्र, ध्वनि या किसी विचार के माध्यम से  ध्यान  करता है। योग, विपश्यना, मंत्र ध्यान, माइंडफुलनेस जैसे विभिन्न प्रकार के ध्यान आज विश्वभर में अपनाए जा रहे हैं। इनका उद्देश्य मन और शरीर के बीच संतुलन स्थापित करना है। तनाव और रक्तचाप पर प्रभाव ध्यान का सबसे प्रमुख शारीरिक लाभ तनाव में कमी है। तनाव शर...

सर्दियों में खजूर क्यों खाना चाहिए - सर्दियों में खजूर कैसे खाएं

  अक्सर लोग पूछते हैं कि सर्दियों  में खजूर क्यों खाना चाहिए। दरअसल खजूर की तासीर गर्म होती है, जो ठंड के मौसम में शरीर का तापमान बनाए रखने में मदद करती है। वैज्ञानिक तौर पर खजूर में मौजूद कार्बोहाइड्रेट और मिनरल्स शरीर को तुरंत एनर्जी देते हैं। यही वजह है कि सर्दियों में खजूर खाने से ठंड कम लगती है और कमजोरी महसूस नहीं होती।  सर्दियों का मौसम आते ही शरीर को ज्यादा गर्माहट और एनर्जी की जरूरत महसूस होने लगती है। ठंड में जल्दी थकान होना, हाथ-पैर ठंडे रहना या कमजोरी लगना आम बात है। ऐसे में खजूर एक ऐसा ड्राई फ्रूट है, जो बिना किसी दवा के शरीर को अंदर से मजबूत बनाता है। खजूर में नेचुरल शुगर, आयरन, फाइबर और जरूरी मिनरल्स होते हैं, जो सर्दियों में शरीर को एक्टिव रखते हैं।  खजूर खाने के फायदे सिर्फ एनर्जी तक सीमित नहीं हैं। इसमें मौजूद फाइबर पाचन को दुरुस्त रखता है और कब्ज की समस्या से राहत देता है। आयरन खून की कमी को दूर करने में मदद करता है। साथ ही खजूर में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट्स सर्दियों में होने वाले इंफेक्शन से शरीर की सुरक्षा करते हैं और इम्यूनिटी को मजबूत बनाते...

रोज 2 खजूर खाने से क्या होता है ?

  खजूर एक ऐसा ड्राई फ्रूट है, जो स्वाद के साथ-साथ सेहत के लिए भी बेहद अच्छा माना जाता है. इसमें फाइबर, आयरन, पोटैशियम, एंटीऑक्सीडेंट्स जैसे कई पोषक तत्व अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं. यही वजह है कि हेल्थ एक्सपर्ट खजूर को डेली डाइट का हिस्सा बनाने की सलाह देते हैं. इसे लेकर वुमन हेल्थ स्पेशलिस्ट और सर्टिफाइड मेनोपॉज कोच निधि कक्कड़ ने भी अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर एक वीडियो शेयर किया है. इस वीडियो में उन्होंने रोज 2 खजूर खाने के फायदे बताए हैं. आइए जानते हैं इनके बारे में, साथ ही जानेंगे खजूर खाने का सबसे अच्छा समय कौन सा हो सकता है.   खजूर खाने से शरीर को लंबे समय तक एनर्जी मिलती रहती है. इसका कारण यह है कि खजूर का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, यानी यह ब्लड शुगर को तेजी से नहीं बढ़ाता, धीरे-धीरे शरीर में रीलीज करता है, जिससे आपको देर तर एनर्जी मिलती रहती है. ऐसे में जिन लोगों को दिनभर एक्टिव रहना होता है, उनके लिए यह बहुत अच्छा स्नैक हो सकता है.  खजूर की तासीर गर्म होती है, इसलिए जब हम खजूर खाते हैं तो शरीर में गर्माहट रहती है. इसलिए खजूर हमें सर्दियों से बचाता है. ख...

अमरूद - कई बिमारिओं का इलाज

  सामान्य मिलने वाले फल अमरूद में प्रोटीन, विटामिन और फाइबर भरपूर होता है जबकि कोलेस्ट्रॉल ना के बराबर।  यह पेट को जल्दी भर देता हैं, जिससे आपको जल्दी भूख नहीं लगती। शुगर की मात्रा कम होने की वजह से यह डायबिटीज के मरीज के लिए लाभदायक है। इसके अलावा यह हरा और मीठा फल सेहत से जुड़ी कई समस्याओं को दूर रखने में सक्षम है। अमरुद की पत्तियों से कई बिमारिओं का इलाज किया जा सकता है। अमरुद कई औषधीय गुणों से भरपूर फल है। इसकी पत्तियां भी बहुत उपयोगी होती हैं या यूं कहें कि अमरूद के फल से ज्यादा इसकी पत्तियां फायदेमंद है। अमरुद की पतियों के फायदे के बारे में बहुत कम जानते हैं ये कई बिमारिओं में फायदेमंद होते हैं। अमरूद के सेवन से होने वाले 14 फायदे : वजन घटाने में :  अमरूद खाने में टेस्टी होने के साथ-साथ वजन कम करने में भी मददगार है। इसमें कैलोरी बहुत कम और फाइबर ’यादा होता है। एक कम अमरूद में 112 कैलोरी होती है जिससे बहुत समय तक भूख का अहसास नहीं होता और धीरे-धीरे वजन भी कम होना शुरू हो जाता है। प्रतिरोधक क्षमता :  विटामिन सी शरीर में रोगों से लडऩे की क्षमता को मजबूत बनाता है ...

संगीत - बीमारी से ठीक होने की म्यूज़िक थेरेपी

  एक स्वस्थ व्यक्ति में, म्यूज़िक सुनने से दिमाग में न्यूरॉन्स के नेटवर्क एक्टिवेट होते हैं जिससे ध्यान, याददाश्त, मोटर फ़ंक्शन और इमोशन प्रोसेसिंग में बढ़ोतरी होती है। स्ट्रोक से ठीक होने के दौरान जब न्यूरॉन प्लास्टिक होते हैं और खुद को ठीक करने की कोशिश कर रहे होते हैं, तो अच्छा म्यूज़िक सुनने से दिमाग के सबकोर्टिकल और कॉर्टिकल हिस्सों के आपस में जुड़े नेटवर्क बेहतर होते हैं, जिससे लंबे समय तक रिकवरी बेहतर होती है। ज़्यादातर स्ट्रोक के मरीज़ अपने ठीक होने के समय का 70 प्रतिशत से ज़्यादा हिस्सा नॉन-थेराप्यूटिक एक्टिविटीज़ में बिताते हैं। रिहैबिलिटेशन पीरियड में म्यूज़िक शामिल करने से रिकवरी प्रोसेस में काफ़ी सुधार के साथ-साथ खुशी भी मिल सकती है। म्यूज़िक हम सभी को हमारे डेली रूटीन में भी मदद कर सकता है। सभी म्यूज़िक हीलिंग हो सकते हैं, खासकर जब उन्हें एक सीक्वेंस में बजाया जाए। नीचे दी गई जानकारी आपको अपना खुद का हीलिंग म्यूज़िक सीक्वेंस बनाने के लिए गाइडलाइन देती है, भले ही आप कोई इंस्ट्रूमेंट न बजाते हों! 1 सही म्यूज़िक चुनें। हममें से ज़्यादातर लोग ऐसा म्यूज़िक चुनते हैं जो हमे...

एक औरत क्या चाहती है ?

 एक औरत क्या चाहती है? यह एक ऐसा सवाल है जो हमेशा एक आदमी को परेशान करता है। वह खुद से पूछता है; वह दूसरे आदमियों से पूछता है, वह भगवान से पूछता है — और फिर भी कोई जवाब नहीं मिलता। हाल ही में, जब युवा ब्यूरोक्रेट्स का एक ग्रुप इकट्ठा हुआ, तो आदमियों ने फिर से सोचा और एक चर्चा शुरू हो गई। हमेशा की तरह भद्दे कमेंट्स और मज़ाक के बाद, वे सीरियस हो गए और फिर जवाब जानने के लिए, अगर कोई जवाब हो, तो महिला सहकर्मियों की ओर मुड़े। थोड़ी नोकझोंक के बाद, यह बात साफ़-साफ़ सामने आई कि औरतों को सबसे ज़्यादा प्यार और अटेंशन चाहिए होता है। जैसा कि एक लेडी ब्यूरोक्रेट ने ग्रुप के सामने शॉर्ट में कहा, “एक औरत जो चाहती है वह है — एक टच, एक लुक और एक बात। इसका मतलब है — प्यार, अटेंशन और कम्युनिकेशन…” एक और ने “खास देखभाल, ध्यान और चाहे जाने की भावना” के लिए चुना। जैसे-जैसे मैं औरतों से पूछती रही, यह साफ़ हो गया कि एक औरत को बार-बार यह बताने की ज़रूरत है कि वह डिज़ायरेबल और डिज़ायरेबल है — और वह अकेली है! ऐसा लग रहा था जैसे वे पूछे जाने का इंतज़ार कर रही थीं। और, एक बार जब बाढ़ के दरवाज़े खुल गए, तो बहा...