जल्दी खाने की आदत बिगाड़ रही है पाचन? लिवर हो रहा खराब! - जानिए क्या कहते हैं डॉक्टर कैसे और कितना खाना खाएं
आज की बिगड़ी हुई और बिजी लाइफस्टाइल में खाना सिर्फ भूख मिटाने का साधन नहीं रहा बल्कि स्ट्रेस, टाइम की कमी और आदतों से जुड़ गया है. लोग बिजी रहने के कारण या तो जल्दी-जल्दी खा लेते हैं या फिर मार्केट से कुछ भी लेकर खा लेते हैं. ऐसे में उन्हें ये तक पता नहीं चल पाता कि वो कैसा खा रहे हैं और कितना खा रहे हैं. दरअसल, जल्दी-जल्दी खाना या फिर जरूरत से अधिक खाना जैसी चीजें फैटी लिवर, मोटापा और पाचन से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ाता है. ऐसे में लिवर स्पेशलिस्ट ने एक इंटरव्यू में बताया है कि इंसान को कितना और कैसे खाना चाहिए ताकि शरीर और लिवर दोनों स्वस्थ रह सकें.
खाना खाते समय जल्दी करना आज की सबसे आम लेकिन सबसे अनदेखी की जाने वाली आदतों में से एक है। गरमा-गरम खाना सामने आते ही लोग बिना सोचे-समझे उसे निगल लेते हैं और बाद में गैस, पेट दर्द, ब्लोटिंग या भारीपन से परेशान होते हैं। UK के जाने-माने सर्जन और हेल्थ कंटेंट क्रिएटर Dr Karan Rajan के अनुसार, खराब पाचन की जड़ अक्सर पेट नहीं, बल्कि हमारी खाने की आदत होती है- खासतौर पर ठीक से ना चबाना।
- डॉक्टर बताते हैं कि पाचन की प्रक्रिया पेट में नहीं, बल्कि मुंह से ही शुरू हो जाती है। जब हम भोजन को धीरे-धीरे और अच्छी तरह चबाते हैं, तो वह छोटे-छोटे कणों में टूट जाता है। इससे पेट के एसिड और पाचन एंजाइम्स को खाना पचाने में आसानी होती है। इसके उलट, अधचबाया खाना सीधे पेट और फिर आंतों तक पहुंचता है जिससे गैस, ऐंठन और ब्लोटिंग की समस्या बढ़ जाती है।
- डॉक्टर का कहना है कि ज्यादातर लोग खाने को कुछ ही बार चबाकर निगल लेते हैं और फिर पेट खराब होने पर हैरान होते हैं। बड़े-बड़े टुकड़ों में पहुंचा खाना आंतों में सही से टूट नहीं पाता और वहीं फर्मेंट होकर गैस और सूजन पैदा करता है।
- सिर्फ पाचन ही नहीं, बल्कि भूख और ओवरईटिंग पर भी चबाने का सीधा असर पड़ता है। इसे ‘हॉर्मोनल फोरप्ले’ कहते हैं। जब हम धीरे खाते हैं तो मुंह के टेस्ट रिसेप्टर्स और पेट के स्ट्रेच रिसेप्टर्स सक्रिय होते हैं। इससे GLP-1, PYY और CCK जैसे हार्मोन रिलीज होते हैं जो दिमाग को संकेत देते हैं कि पेट भर चुका है। जल्दी खाने पर ये संकेत समय पर नहीं पहुंचते और व्यक्ति जरूरत से ज्यादा खा लेता है।
- इसके अलावा, तेजी से खाना खाने पर शरीर ‘फाइट या फ्लाइट’ मोड में चला जाता है जिससे पाचन प्रक्रिया धीमी और कमजोर हो जाती है। जबकि धीरे-धीरे खाने से शरीर ‘रेस्ट एंड डाइजेस्ट’ मोड में आता है जिससे पेट रिलैक्स करता है, ब्लड फ्लो बढ़ता है और एंजाइम्स बेहतर काम करते हैं।
- हर निवाले को तब तक चबाएं जब तक उसकी बनावट बदल ना जाए, खाने के बीच चम्मच नीचे रखें और कम से कम 15–20 मिनट में भोजन पूरा करें। यह छोटी-सी आदत पाचन सुधारने के साथ-साथ गैस, ब्लोटिंग और ओवरईटिंग से भी बचा सकती है।भूख के बराबर नहीं खाना चाहिए. खाते समय पेट और दिमाग के बीच तालमेल बनने में समय लगता है. दिमाग को यह समझने में करीब 20 मिनट लगते हैं कि पेट भर चुका है. अगर कोई 5–10 मिनट में खाना खत्म कर देता है तो उसे नहीं महसूस होगा कि उसने खाना खा लिया है और उसे फिर दोबारा भूख लगेगी. इसलिए हमेशा खाना धीरे-धीरे और आराम से खाना बेहद जरूरी है.जल्दी-जल्दी चबाकर निगला हुआ खाना लिवर और पाचन तंत्र के लिए नुकसानदेह हो सकता है.
- खाने के साथ पानी बिल्कुल न लें. इससे डाइजेस्टिव जूस पतले हो जाते हैं और वो खाना सही से नहीं पचा पाते. पानी पीना हो तो खाने से पहले या खाने के 30–40 मिनट बाद पीना बेहतर रहता है. फुल प्लेट की जगह डेजर्ट प्लेट या हाफ प्लेट में खाना लें. छोटी प्लेट अपने आप खाने की मात्रा को नियंत्रित कर देती है.
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