खाना खाते समय जल्दी करना आज की सबसे आम लेकिन सबसे अनदेखी की जाने वाली आदतों में से एक है। गरमा-गरम खाना सामने आते ही लोग बिना सोचे-समझे उसे निगल लेते हैं और बाद में गैस, पेट दर्द, ब्लोटिंग या भारीपन से परेशान होते हैं। UK के जाने-माने सर्जन और हेल्थ कंटेंट क्रिएटर Dr Karan Rajan के अनुसार, खराब पाचन की जड़ अक्सर पेट नहीं, बल्कि हमारी खाने की आदत होती है- खासतौर पर ठीक से ना चबाना।
- डॉक्टर बताते हैं कि पाचन की प्रक्रिया पेट में नहीं, बल्कि मुंह से ही शुरू हो जाती है। जब हम भोजन को धीरे-धीरे और अच्छी तरह चबाते हैं, तो वह छोटे-छोटे कणों में टूट जाता है। इससे पेट के एसिड और पाचन एंजाइम्स को खाना पचाने में आसानी होती है। इसके उलट, अधचबाया खाना सीधे पेट और फिर आंतों तक पहुंचता है जिससे गैस, ऐंठन और ब्लोटिंग की समस्या बढ़ जाती है।
- डॉक्टर का कहना है कि ज्यादातर लोग खाने को कुछ ही बार चबाकर निगल लेते हैं और फिर पेट खराब होने पर हैरान होते हैं। बड़े-बड़े टुकड़ों में पहुंचा खाना आंतों में सही से टूट नहीं पाता और वहीं फर्मेंट होकर गैस और सूजन पैदा करता है।
- सिर्फ पाचन ही नहीं, बल्कि भूख और ओवरईटिंग पर भी चबाने का सीधा असर पड़ता है। इसे ‘हॉर्मोनल फोरप्ले’ कहते हैं। जब हम धीरे खाते हैं तो मुंह के टेस्ट रिसेप्टर्स और पेट के स्ट्रेच रिसेप्टर्स सक्रिय होते हैं। इससे GLP-1, PYY और CCK जैसे हार्मोन रिलीज होते हैं जो दिमाग को संकेत देते हैं कि पेट भर चुका है। जल्दी खाने पर ये संकेत समय पर नहीं पहुंचते और व्यक्ति जरूरत से ज्यादा खा लेता है।
- इसके अलावा, तेजी से खाना खाने पर शरीर ‘फाइट या फ्लाइट’ मोड में चला जाता है जिससे पाचन प्रक्रिया धीमी और कमजोर हो जाती है। जबकि धीरे-धीरे खाने से शरीर ‘रेस्ट एंड डाइजेस्ट’ मोड में आता है जिससे पेट रिलैक्स करता है, ब्लड फ्लो बढ़ता है और एंजाइम्स बेहतर काम करते हैं।
- हर निवाले को तब तक चबाएं जब तक उसकी बनावट बदल ना जाए, खाने के बीच चम्मच नीचे रखें और कम से कम 15–20 मिनट में भोजन पूरा करें। यह छोटी-सी आदत पाचन सुधारने के साथ-साथ गैस, ब्लोटिंग और ओवरईटिंग से भी बचा सकती है।
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