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सर्दियों में डाइजेशन से लेकर इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए ये 5 फूड्स खाएं

  सीजनल सब्जियों और फलों को खाने की सलाह तो हर कोई देता है। खासतौर पर ठंड के मौसम में जब डाइजेशन कमजोर हो जाता है और इम्यूनिटी वीक हो जाती है। जिसकी वजह से सर्दी, जुकाम, खांसी परेशान करती है। वहीं ओवरऑल हेल्थ पर भी सर्दियों का निगेटिव असर दिखने लगता है। ऐसे में आशलोक अस्पताल के डॉक्टर आलोक चोपड़ा ने हेल्दी रहने के लिए कुछ फूड्स की लिस्ट शेयर की है। जिन्हें सर्दियों के सीजन में खाना बेस्ट ऑप्शन है। सरसों का साग सर्दियों के सीजन में सरसों का साग जरूर खाएं। विटामिन ए, सी और के से भरपूर होने के साथ ही इसमे हाई फाइबर कंटेट होता है। जो डाइजेशन को स्मूद करने के साथ ही कॉन्सटिपेशन को कंट्रोल करता है और साथ ही हार्ट हेल्थ को सपोर्ट करता है। कच्ची हल्दी कच्ची फ्रेश हल्दी मार्केट में आसानी से सर्दियों में मिल जाती है। इसे अपनी रोजाना की डाइट में शामिल करें। हल्दी में पावरफुल एंटीऑक्सीडेंट होते हैं और साथ ही नेचुरल एंटी इंफ्लामेटरी भी होती है। स्किन के साथ ही इम्यूनिटी को सपोर्ट करती है और रोजाना हल्दी वाली ड्रिंक इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करेगी। खजूर सर्दियों में होने वाली थकान को दूर करने के ...

हम मृत्यु के लिए स्वयं को कैसे तैयार करें ?

  ओशो, हम मृत्यु के लिए स्वयं को कैसे तैयार करें? संग्रह मत करो।संसार में रहो, लेकिन संसार के मत बनो। किसी भी चीज़ का संग्रह मत करो — न शक्ति का, न धन का, न प्रतिष्ठा का, न पुण्य का, न ज्ञान का, यहाँ तक कि तथाकथित आध्यात्मिक अनुभवों का भी नहीं। यदि तुम संग्रह नहीं करते, तो तुम किसी भी क्षण मरने के लिए तैयार हो, क्योंकि खोने के लिए तुम्हारे पास कुछ भी नहीं है। मृत्यु का भय वास्तव में मृत्यु का भय नहीं है; मृत्यु का भय जीवन में किए गए संग्रह से पैदा होता है। तब तुम्हारे पास बहुत कुछ होता है जिसे तुम खो सकते हो। तुम उससे चिपक जाते हो। यही जीसस के इस कथन का अर्थ है: “धन्य हैं वे जो आत्मा में गरीब हैं।” मैं यह नहीं कह रहा कि भिखारी बन जाओ, और न ही यह कि संसार का त्याग कर दो। मैं यह कह रहा हूँ: संसार में रहो, लेकिन संसार के मत बनो। भीतर संग्रह मत करो, आत्मा में गरीब रहो। किसी भी चीज़ के स्वामी मत बनो — तब तुम मृत्यु के लिए तैयार हो। समस्या जीवन नहीं है, समस्या है अधिकार-भाव। जितना अधिक तुम किसी चीज़ के स्वामी बनते हो, उतना ही अधिक उसे खोने का भय होता है। यदि तुम किसी भी चीज़ के स्वामी नह...

स्वस्थ पाचन के लिए महत्वपूर्ण सलाह - आयुर्वेदिक ग्रन्थ अष्टांग हृदयम

       इस वीडियो में स्वास्थ्य संबंधी - पाचन में समस्या पर एक महत्र्वपूर्ण जानकारी दी गयी है- भोजन के तुरंत बाद अपनायें ये ५ आयुर्वेदिक नियम  आयुर्वेदिक ग्रन्थ ‘अष्टांग हृदयम्’  : एक परिचयात्मक लेख अष्टांग हृदयम् आयुर्वेद का एक संक्षिप्त, सुव्यवस्थित और व्यावहारिक ग्रन्थ है, जिसने आयुर्वेद को जनसुलभ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आधुनिक काल में भी इसके सिद्धांत और उपचार पद्धतियाँ प्रासंगिक हैं और समग्र स्वास्थ्य की दृष्टि से मार्गदर्शन प्रदान करती हैं। आयुर्वेद के प्राचीन एवं प्रमाणिक ग्रन्थों में अष्टांग हृदयम् का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह ग्रन्थ आयुर्वेद के महान आचार्य वाग्भट द्वारा रचित माना जाता है। आयुर्वेद के तीन प्रमुख ग्रन्थ— चरक संहिता , सुश्रुत संहिता और अष्टांग हृदयम् —को आयुर्वेद की त्रयी कहा जाता है। इनमें अष्टांग हृदयम् अपनी सरल भाषा, सूत्रात्मक शैली और व्यावहारिक उपयोगिता के कारण विशेष रूप से लोकप्रिय रहा है। अष्टांग हृदयम् का मुख्य उद्देश्य आयुर्वेद के सिद्धांतों और चिकित्सा पद्धतियों को संक्षिप्त, स्पष्ट और सुबोध रूप में प्...

विपरीत परिस्थितियों में मन को शांत और स्थिर रखने की शक्ति - तितिक्षा

  तितिक्षा मय जीवन कैसे जीयें??? --------------------------- तितिक्षा (Titiksha) का अर्थ है -   सहनशीलता, धीरज और मानसिक दृढ़ता ,  विशेषकर सुख-दुख, सर्दी-गर्मी, मान-अपमान जैसे द्वंद्वों को बिना विलाप या शिकायत के सहन करने की क्षमता;  यह बाहरी परिस्थितियों के बावजूद मन को शांत और स्थिर रखने की आध्यात्मिक शक्ति है, जो आध्यात्मिक उन्नति के लिए आवश्यक मानी जाती है।   मुख्य बिंदु: सहनशक्ति:   यह सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक सहनशक्ति भी है, जो कष्टों के प्रति प्रतिक्रिया किए बिना उन्हें स्वीकार करती है।   द्वंद्वों को सहना:   इसमें सर्दी, गर्मी, सुख, दुख, लाभ, हानि, मान, अपमान जैसे जीवन के सभी विरोधाभासी अनुभवों को स्वीकार करना शामिल है।   आध्यात्मिक महत्व:   आदि शंकराचार्य और स्वामी विवेकानंद जैसे विचारकों ने इसे आत्म-ज्ञान और योग के मार्ग में एक महत्वपूर्ण योग्यता बताया है, जो मन को बाहरी प्रभावों से मुक्त करती है।   शांत प्रतिक्रिया:   तितिक्षा का मतलब उदासीनता नहीं, बल्कि यह सिखाती है कि मन को आंतरिक रूप से शांत ...

विश्व ध्यान दिवस - 21 दिसम्बर

  विश्व ध्यान दिवस - एक विश्व, एक हृदय 21 दिसम्बर, 2025 को 20 मिनट के निर्देशित हार्टफुलनेस ध्यान के लिए विश्व भर में लाखों लोगों से जुड़ें। क्या आप जानते हैं?  विश्व ध्यान दिवस पर दुनिया के सभी धर्मों  व् विचारों के  लाखों लोग अपने घर से ही  यू ट्यूब के माध्यम से एक साथ जुड़ रहे हैं , आप भी इस में सम्मलित होने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर रजिस्टर करें व् विश्व में शांति व्  स्वास्थ्य लाभ को प्रसारित करने के महत कार्य में अपना योगदान दें।  नि:शुल्क पंजीकरण करे -  अभी https://hfn.link/meditation आधुनिक जीवनशैली में भागदौड़, तनाव, अनियमित दिनचर्या और मानसिक दबाव ने मनुष्य के शारीरिक स्वास्थ्य पर गहरा नकारात्मक प्रभाव डाला है। ऐसे समय में ध्यान (Meditation) एक प्राचीन लेकिन अत्यंत प्रभावी साधना के रूप में उभरकर सामने आया है। ध्यान केवल मानसिक शांति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संपूर्ण शारीरिक स्वास्थ्य को भी सुदृढ़ करता है। वैज्ञानिक शोधों ने सिद्ध किया है कि नियमित ध्यान अभ्यास से शरीर की अनेक प्रणालियाँ बेहतर ढंग से कार्य करने लगती हैं। ध्यान का अर्थ और...

ध्यान का शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रभाव

  “ध्यान का शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रभाव”  पर उपरोक्त वीडियो देखें  ध्यान का शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रभाव आधुनिक जीवनशैली में भागदौड़, तनाव, अनियमित दिनचर्या और मानसिक दबाव ने मनुष्य के शारीरिक स्वास्थ्य पर गहरा नकारात्मक प्रभाव डाला है। ऐसे समय में ध्यान (Meditation) एक प्राचीन लेकिन अत्यंत प्रभावी साधना के रूप में उभरकर सामने आया है। ध्यान केवल मानसिक शांति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संपूर्ण शारीरिक स्वास्थ्य को भी सुदृढ़ करता है। वैज्ञानिक शोधों ने सिद्ध किया है कि नियमित ध्यान अभ्यास से शरीर की अनेक प्रणालियाँ बेहतर ढंग से कार्य करने लगती हैं। ध्यान का अर्थ और स्वरूप ध्यान —  मन को वर्तमान क्षण में स्थिर करने की प्रक्रिया है, जिसमें व्यक्ति अपनी श्वास, मंत्र, ध्वनि या किसी विचार के माध्यम से  ध्यान  करता है। योग, विपश्यना, मंत्र ध्यान, माइंडफुलनेस जैसे विभिन्न प्रकार के ध्यान आज विश्वभर में अपनाए जा रहे हैं। इनका उद्देश्य मन और शरीर के बीच संतुलन स्थापित करना है। तनाव और रक्तचाप पर प्रभाव ध्यान का सबसे प्रमुख शारीरिक लाभ तनाव में कमी है। तनाव शर...

सर्दियों में खजूर क्यों खाना चाहिए - सर्दियों में खजूर कैसे खाएं

  अक्सर लोग पूछते हैं कि सर्दियों  में खजूर क्यों खाना चाहिए। दरअसल खजूर की तासीर गर्म होती है, जो ठंड के मौसम में शरीर का तापमान बनाए रखने में मदद करती है। वैज्ञानिक तौर पर खजूर में मौजूद कार्बोहाइड्रेट और मिनरल्स शरीर को तुरंत एनर्जी देते हैं। यही वजह है कि सर्दियों में खजूर खाने से ठंड कम लगती है और कमजोरी महसूस नहीं होती।  सर्दियों का मौसम आते ही शरीर को ज्यादा गर्माहट और एनर्जी की जरूरत महसूस होने लगती है। ठंड में जल्दी थकान होना, हाथ-पैर ठंडे रहना या कमजोरी लगना आम बात है। ऐसे में खजूर एक ऐसा ड्राई फ्रूट है, जो बिना किसी दवा के शरीर को अंदर से मजबूत बनाता है। खजूर में नेचुरल शुगर, आयरन, फाइबर और जरूरी मिनरल्स होते हैं, जो सर्दियों में शरीर को एक्टिव रखते हैं।  खजूर खाने के फायदे सिर्फ एनर्जी तक सीमित नहीं हैं। इसमें मौजूद फाइबर पाचन को दुरुस्त रखता है और कब्ज की समस्या से राहत देता है। आयरन खून की कमी को दूर करने में मदद करता है। साथ ही खजूर में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट्स सर्दियों में होने वाले इंफेक्शन से शरीर की सुरक्षा करते हैं और इम्यूनिटी को मजबूत बनाते...