सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

नहीं मैं तन्हा तो नहीं ,

नहीं मैं तन्हा तो नहीं ,
       मेरे साथ हैं इस -फेस बुक पे निरंतर होते -स्टेटस अपडेट-
       मेरी सबसे अजीज़ गर्ल फ्रेंड ---" जागो - यही एकमात्र कार्य है ,
       मित्र 1 - फिल्म पहचानो प्रतियोगिता
       मित्र 2 - चलाओ न नैनो के बाण रे
       मित्र 3 - संता बंता के लेटेस्ट
       मित्र 4 - चले जाने दो उस बेवफा को किसी और की बांहों में
       मित्र 5 -  लव इस द ओनली मिरेकल
       मित्र 6 - फोटो - स्विट्ज़रलैंड
       मित्र 7 - जोया मेरा नया जूनून
       मित्र 8 - रियली वंडरफुल टिप
       मित्र 9 - जिन्दगी भी साली ग्रामर जैसी है
                   और कुछ सिरफिरे जिन्दगी जिनको ग्रामर जैसी नहीं लगती -
        जो सिर्फ ठीक से सो नहीं पाने की वजह से फेस बुक पर नहीं आते ---
         1 - फोटो - उत्तराखंड एक त्रासदी
         2 - उत्तराखंड में सेना द्वारा राहत
         3 - उत्तराखंड में आर एस एस द्वारा राहत
         ४- उत्तराखंड में बाबा राम देव
         5 -उत्तराखंड में मोदी
         6 - उत्तराखंड में सरकार की  ऐसी तैसी
 और हाँ मेरे साथ हैं - मुल्क के तमाम टी वी चैनलोँ पर बिखरे
 बिलखते - रोते वो तमाम चेहरे जो बस मौत के मुँह से निकल आये ,
और कुछ हैं जिनका मौत से संघर्ष जारी है ,
मात्र कुछ हजार ही तो हैं ---------
मात्र दस हजार फीट की उंचाई पर ही तो हैं ------
मात्र कुछ दिन से भूखे प्यासे ही तो हैं ------------
यार तुम हमें क्यों डिस्टर्ब कर रहे हो  ?
हमें अपडेट करने दो न -------------
देखो वंहा सेना है -- बाबा रामदेव हैं ---आर आर एस है --- मोदी है न
मैं अपनी प्यारी कुतिया लैला के साथ कितनी मस्त लग रही हूँ ?
इस फोटो को कितने लाइक मिले -- सच्ची
और वो मेरी अजीज़ गर्ल फ्रेंड जब उसके अपडेट पर मैंने मैसेज दिया
गुड मॉर्निंग ---
पर वो मुझे तन्हा छोड़ कर न जाने कंहा चली गयी .
झूठ बोलती हो तुम अन्नू -
-जागो - तुम यही एक मात्र कार्य है -
मुझे तो लगता है - जिन्दगी का सच ये है कि
सोओ -----यही एक मात्र कार्य है ,
इसी लिये तो मैंने अपने सीने पे लिखवा लिया है अन्नू
EAT - DRINK- &  SLEEP.

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

विश्व ध्यान दिवस - 21 दिसम्बर

  विश्व ध्यान दिवस - एक विश्व, एक हृदय 21 दिसम्बर, 2025 को 20 मिनट के निर्देशित हार्टफुलनेस ध्यान के लिए विश्व भर में लाखों लोगों से जुड़ें। क्या आप जानते हैं?  विश्व ध्यान दिवस पर दुनिया के सभी धर्मों  व् विचारों के  लाखों लोग अपने घर से ही  यू ट्यूब के माध्यम से एक साथ जुड़ रहे हैं , आप भी इस में सम्मलित होने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर रजिस्टर करें व् विश्व में शांति व्  स्वास्थ्य लाभ को प्रसारित करने के महत कार्य में अपना योगदान दें।  नि:शुल्क पंजीकरण करे -  अभी https://hfn.link/meditation आधुनिक जीवनशैली में भागदौड़, तनाव, अनियमित दिनचर्या और मानसिक दबाव ने मनुष्य के शारीरिक स्वास्थ्य पर गहरा नकारात्मक प्रभाव डाला है। ऐसे समय में ध्यान (Meditation) एक प्राचीन लेकिन अत्यंत प्रभावी साधना के रूप में उभरकर सामने आया है। ध्यान केवल मानसिक शांति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संपूर्ण शारीरिक स्वास्थ्य को भी सुदृढ़ करता है। वैज्ञानिक शोधों ने सिद्ध किया है कि नियमित ध्यान अभ्यास से शरीर की अनेक प्रणालियाँ बेहतर ढंग से कार्य करने लगती हैं। ध्यान का अर्थ और...

हार्टफुलनेस ध्यान

  ध्यान का अनुभव करें हार्ट फुलनेस ध्यान सीखने के लिए क्लिक करें हार्टफुलनेस ध्यान एक वैश्विक उपस्थिति वाली ध्यान परंपरा है जो साधकों को कुछ सरल अभ्यासों के माध्यम से  मानवीय चेतना की उत्कृष्टता का अनुभव करने में सक्षम बनाती है। हार्टफुलनेस पर वैज्ञानिक अध्ययनों ने मनुष्यों पर इसके प्रभावों का अन्वेषण शुरू कर दिया है । हार्टफुलनेस ध्यान  के प्रभाव की हमारी समझ को और गहराई से बढ़ाने के लिए, इस परंपरा के विभिन्न अभ्यासों का स्पष्ट विवरण आवश्यक है, साथ ही उस दर्शन को भी समझना होगा जिस पर ये अभ्यास आधारित हैं। अब तक, अधिकांश शोध ध्यान  प्रभावों पर केंद्रित रहे हैं, और अधिकांशतः उस दर्शन या परंपरा पर विचार नहीं किया गया है जिससे ये ध्यान अभ्यास उत्पन्न होते हैं। आध्यात्मिक ध्यान अभ्यासों की सच्ची वैज्ञानिक समझ के लिए इस दर्शन को स्वीकार करना आवश्यक है, साथ ही उन तंत्रिका-शरीर क्रिया संबंधी सहसंबंधों और मानसिक अवस्थाओं को भी समझना आवश्यक है जिनसे वे जुड़े हो सकते हैं। वास्तव में, हार्टफुलनेस अभ्यासों का विकास योगिक अनुसंधान और आध्यात्मिक गुरुओं एवं उनके सहय...

अपने मन को कंट्रोल करना

  क्या जान-बूझकर ज़िंदगी के ज़्यादा अच्छे अनुभव बनाना मुमकिन है? ज़्यादातर लोगों को ज़िंदगी के कुछ ही अच्छे अनुभव इसलिए मिलते हैं क्योंकि वे लगभग पूरी तरह से बेहोश होते हैं। वे ऑटोमैटिक, सबकॉन्शियस प्रोग्राम पर काम कर रहे होते हैं जो बैकग्राउंड में चुपचाप चलते रहते हैं, उनके हर कदम को तय करते हैं, उनके इमोशनल तार खींचते हैं, उनकी सोच को चुनते हैं, और उनके अनुभवों को पिछली चोटों, डर और इनसिक्योरिटी के हिसाब से बनाते हैं। मज़े की बात यह है कि उन्हें लगता है कि वे होश में हैं। पागलपन भरे, खुद को और दूसरों को नुकसान पहुँचाने वाले तरीके से काम करना होश में नहीं है। और सिर्फ़ अपनी इच्छाओं के हिसाब से काम करने की वजह से ही हम बेहोश होते हैं। जो होश में होता है, वह अपनी इच्छाओं को अपने विचारों, भावनाओं और कामों पर हावी नहीं होने देता। इसके बजाय, वह अभी जो जानता है, उसके आधार पर अपने लिए सबसे अच्छे ऑप्शन चुनता है। आपके आस-पास के लोगों का एक आम सर्वे जल्दी ही बता देगा कि बिना सोचे-समझे काम करना आम बात है। समझदारी, जन्मजात इच्छाओं और इच्छाओं के आगे पीछे रह जाती है। सचेत होने का तरीका है जागरू...