सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

इक ग़ज़ल

इक ग़ज़ल उस पे लिखूँ दिल का तकाज़ा है बहुत
इन दिनों ख़ुद से बिछड़ जाने का धड़का है बहुत
रात हो दिन हो ग़फ़लत हो कि बेदारी हो
उसको देखा तो नहीं है उसे सोचा है बहुत
तश्नगी के भी मुक़ामात हैं क्या क्या
यानी कभी दरिया नहीं काफ़ी, कभी क़तरा है बहुत
मेरे हाथों की लकीरों के इज़ाफ़े हैं गवाह
मैं ने पत्थर की तरह ख़ुद को तराशा है बहुत
कोई आया है ज़रूर और यहाँ ठहरा भी है
घर की दहलीज़ पे ऐ यारों उजाला है बहुत

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

विश्व ध्यान दिवस - 21 दिसम्बर

  विश्व ध्यान दिवस - एक विश्व, एक हृदय 21 दिसम्बर, 2025 को 20 मिनट के निर्देशित हार्टफुलनेस ध्यान के लिए विश्व भर में लाखों लोगों से जुड़ें। क्या आप जानते हैं?  विश्व ध्यान दिवस पर दुनिया के सभी धर्मों  व् विचारों के  लाखों लोग अपने घर से ही  यू ट्यूब के माध्यम से एक साथ जुड़ रहे हैं , आप भी इस में सम्मलित होने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर रजिस्टर करें व् विश्व में शांति व्  स्वास्थ्य लाभ को प्रसारित करने के महत कार्य में अपना योगदान दें।  नि:शुल्क पंजीकरण करे -  अभी https://hfn.link/meditation आधुनिक जीवनशैली में भागदौड़, तनाव, अनियमित दिनचर्या और मानसिक दबाव ने मनुष्य के शारीरिक स्वास्थ्य पर गहरा नकारात्मक प्रभाव डाला है। ऐसे समय में ध्यान (Meditation) एक प्राचीन लेकिन अत्यंत प्रभावी साधना के रूप में उभरकर सामने आया है। ध्यान केवल मानसिक शांति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संपूर्ण शारीरिक स्वास्थ्य को भी सुदृढ़ करता है। वैज्ञानिक शोधों ने सिद्ध किया है कि नियमित ध्यान अभ्यास से शरीर की अनेक प्रणालियाँ बेहतर ढंग से कार्य करने लगती हैं। ध्यान का अर्थ और...

अपने मन को कंट्रोल करना

  क्या जान-बूझकर ज़िंदगी के ज़्यादा अच्छे अनुभव बनाना मुमकिन है? ज़्यादातर लोगों को ज़िंदगी के कुछ ही अच्छे अनुभव इसलिए मिलते हैं क्योंकि वे लगभग पूरी तरह से बेहोश होते हैं। वे ऑटोमैटिक, सबकॉन्शियस प्रोग्राम पर काम कर रहे होते हैं जो बैकग्राउंड में चुपचाप चलते रहते हैं, उनके हर कदम को तय करते हैं, उनके इमोशनल तार खींचते हैं, उनकी सोच को चुनते हैं, और उनके अनुभवों को पिछली चोटों, डर और इनसिक्योरिटी के हिसाब से बनाते हैं। मज़े की बात यह है कि उन्हें लगता है कि वे होश में हैं। पागलपन भरे, खुद को और दूसरों को नुकसान पहुँचाने वाले तरीके से काम करना होश में नहीं है। और सिर्फ़ अपनी इच्छाओं के हिसाब से काम करने की वजह से ही हम बेहोश होते हैं। जो होश में होता है, वह अपनी इच्छाओं को अपने विचारों, भावनाओं और कामों पर हावी नहीं होने देता। इसके बजाय, वह अभी जो जानता है, उसके आधार पर अपने लिए सबसे अच्छे ऑप्शन चुनता है। आपके आस-पास के लोगों का एक आम सर्वे जल्दी ही बता देगा कि बिना सोचे-समझे काम करना आम बात है। समझदारी, जन्मजात इच्छाओं और इच्छाओं के आगे पीछे रह जाती है। सचेत होने का तरीका है जागरू...

विपरीत परिस्थितियों में मन को शांत और स्थिर रखने की शक्ति - तितिक्षा

  तितिक्षा मय जीवन कैसे जीयें??? --------------------------- तितिक्षा (Titiksha) का अर्थ है -   सहनशीलता, धीरज और मानसिक दृढ़ता ,  विशेषकर सुख-दुख, सर्दी-गर्मी, मान-अपमान जैसे द्वंद्वों को बिना विलाप या शिकायत के सहन करने की क्षमता;  यह बाहरी परिस्थितियों के बावजूद मन को शांत और स्थिर रखने की आध्यात्मिक शक्ति है, जो आध्यात्मिक उन्नति के लिए आवश्यक मानी जाती है।   मुख्य बिंदु: सहनशक्ति:   यह सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक सहनशक्ति भी है, जो कष्टों के प्रति प्रतिक्रिया किए बिना उन्हें स्वीकार करती है।   द्वंद्वों को सहना:   इसमें सर्दी, गर्मी, सुख, दुख, लाभ, हानि, मान, अपमान जैसे जीवन के सभी विरोधाभासी अनुभवों को स्वीकार करना शामिल है।   आध्यात्मिक महत्व:   आदि शंकराचार्य और स्वामी विवेकानंद जैसे विचारकों ने इसे आत्म-ज्ञान और योग के मार्ग में एक महत्वपूर्ण योग्यता बताया है, जो मन को बाहरी प्रभावों से मुक्त करती है।   शांत प्रतिक्रिया:   तितिक्षा का मतलब उदासीनता नहीं, बल्कि यह सिखाती है कि मन को आंतरिक रूप से शांत ...