सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

लिवर को साइलेंटली क‍िल कर रहे ये 3 फूड्स - डॉ. ने बताया लिवर के लिए सबसे खराब चीजें कौन सी हैं




Liver Health: लिवर को साइलेंटली क‍िल कर रहे ये 3 फूड्स, डॉ. ने बताया लिवर के लिए सबसे खराब चीजें कौन सी हैं

 

Liver Health: लिवर को साइलेंटली क‍िल कर रहे ये 3 फूड्स, डॉ. सौरभ सेठी ने बताया लिवर के लिए सबसे खराब चीजें कौन सी हैं

3 Foods That Are Bad For Your Liver: AIIMS, हार्वर्ड और स्टैनफोर्ड से ट्रेंड गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. के अनुसार आप रोजमरा की ज़िंदगी में आप 3 ऐसे फूड्स खा रहे हैं, जो आपके लिवर को बीमार नही और बीमार कर रहे हैं, जानना चाहते हैं कौन से हैं वो 3 फूड्स? 

3 Foods That Are Bad For Your Liver: लिवर हमारी बॉडी का वो ज़रूरी अंग है, जो शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकालने में मदद करता है. ऐसे में खुद को बीमारियों से दूर रखने के लिए इसका सही रहना बेहद जरूरी है, लेकिन क्या आप जानते हैं AIIMS, हार्वर्ड और स्टैनफोर्ड से ट्रेंड गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. के अनुसार आप रोज़मर्रा की ज़िंदगी में 3 ऐसे फूड्स खा रहे हैं, जो आपके लिवर को सेहतमंद नहीं बल्कि बीमार कर रहे हैं, जानना चाहते हैं कौन से हैं वो 3 फूड्स? स्टोरी में बने रहिए. 

लिवर के लिए सबसे खराब खाना कौन सा होता है?

शुगरी ड्रिंक्स:  ये ड्रिंक्स लिवर के लिए एक लिक्विड ज़हर की तरह काम करती हैं, सोडा, पैकेज्ड फ्रूट जूस, एनर्जी ड्रिंक्स, मीठी चाय या कॉफी, इनमें भरपूर मात्रा में खाली कैलोरी होती है और ये आपके लिवर को गंभीर रूप से नुकसान पहुंच सकते हैं, जिससे फैटी लिवर रोग हो सकता है.

तला हुआ खाना: डीप फ्राइड फूड लिवर के सेल्स को नुकसान पहुंचकर शरीर में न सिर्फ़ स्ट्रेस बढ़ाता है, बल्कि सूजन का भी कारण बनता है. ऐसे में अगर आप तला हुआ खाने के शौकीन हैं, तो आज से बदल लें अपनी यह आदत, नहीं तो आपके लिवर को भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है.

अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड: अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड जैसे चिप्स, कैंडी, मीठे अनाज, हॉट डॉग और इंस्टेंट नूडल्स जैसी चीज़ों के शौकीन हैं, तो अपनी इस आदत को आज से बदल लें क्योंकि ये लिवर की हेल्थ के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं. लिवर से जुड़ी समस्याओं जैसे फैटी लिवर रोग के जोखिम को कम करने के लिए इन चीज़ों को खाने से बचें और साबुत अनाज, फलों, सब्ज़ियों और स्वस्थ वसा से भरपूर संतुलित आहार पर ध्यान दें.

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

विश्व ध्यान दिवस - 21 दिसम्बर

  विश्व ध्यान दिवस - एक विश्व, एक हृदय 21 दिसम्बर, 2025 को 20 मिनट के निर्देशित हार्टफुलनेस ध्यान के लिए विश्व भर में लाखों लोगों से जुड़ें। क्या आप जानते हैं?  विश्व ध्यान दिवस पर दुनिया के सभी धर्मों  व् विचारों के  लाखों लोग अपने घर से ही  यू ट्यूब के माध्यम से एक साथ जुड़ रहे हैं , आप भी इस में सम्मलित होने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर रजिस्टर करें व् विश्व में शांति व्  स्वास्थ्य लाभ को प्रसारित करने के महत कार्य में अपना योगदान दें।  नि:शुल्क पंजीकरण करे -  अभी https://hfn.link/meditation आधुनिक जीवनशैली में भागदौड़, तनाव, अनियमित दिनचर्या और मानसिक दबाव ने मनुष्य के शारीरिक स्वास्थ्य पर गहरा नकारात्मक प्रभाव डाला है। ऐसे समय में ध्यान (Meditation) एक प्राचीन लेकिन अत्यंत प्रभावी साधना के रूप में उभरकर सामने आया है। ध्यान केवल मानसिक शांति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संपूर्ण शारीरिक स्वास्थ्य को भी सुदृढ़ करता है। वैज्ञानिक शोधों ने सिद्ध किया है कि नियमित ध्यान अभ्यास से शरीर की अनेक प्रणालियाँ बेहतर ढंग से कार्य करने लगती हैं। ध्यान का अर्थ और...

हार्टफुलनेस ध्यान

  ध्यान का अनुभव करें हार्ट फुलनेस ध्यान सीखने के लिए क्लिक करें हार्टफुलनेस ध्यान एक वैश्विक उपस्थिति वाली ध्यान परंपरा है जो साधकों को कुछ सरल अभ्यासों के माध्यम से  मानवीय चेतना की उत्कृष्टता का अनुभव करने में सक्षम बनाती है। हार्टफुलनेस पर वैज्ञानिक अध्ययनों ने मनुष्यों पर इसके प्रभावों का अन्वेषण शुरू कर दिया है । हार्टफुलनेस ध्यान  के प्रभाव की हमारी समझ को और गहराई से बढ़ाने के लिए, इस परंपरा के विभिन्न अभ्यासों का स्पष्ट विवरण आवश्यक है, साथ ही उस दर्शन को भी समझना होगा जिस पर ये अभ्यास आधारित हैं। अब तक, अधिकांश शोध ध्यान  प्रभावों पर केंद्रित रहे हैं, और अधिकांशतः उस दर्शन या परंपरा पर विचार नहीं किया गया है जिससे ये ध्यान अभ्यास उत्पन्न होते हैं। आध्यात्मिक ध्यान अभ्यासों की सच्ची वैज्ञानिक समझ के लिए इस दर्शन को स्वीकार करना आवश्यक है, साथ ही उन तंत्रिका-शरीर क्रिया संबंधी सहसंबंधों और मानसिक अवस्थाओं को भी समझना आवश्यक है जिनसे वे जुड़े हो सकते हैं। वास्तव में, हार्टफुलनेस अभ्यासों का विकास योगिक अनुसंधान और आध्यात्मिक गुरुओं एवं उनके सहय...

अपने मन को कंट्रोल करना

  क्या जान-बूझकर ज़िंदगी के ज़्यादा अच्छे अनुभव बनाना मुमकिन है? ज़्यादातर लोगों को ज़िंदगी के कुछ ही अच्छे अनुभव इसलिए मिलते हैं क्योंकि वे लगभग पूरी तरह से बेहोश होते हैं। वे ऑटोमैटिक, सबकॉन्शियस प्रोग्राम पर काम कर रहे होते हैं जो बैकग्राउंड में चुपचाप चलते रहते हैं, उनके हर कदम को तय करते हैं, उनके इमोशनल तार खींचते हैं, उनकी सोच को चुनते हैं, और उनके अनुभवों को पिछली चोटों, डर और इनसिक्योरिटी के हिसाब से बनाते हैं। मज़े की बात यह है कि उन्हें लगता है कि वे होश में हैं। पागलपन भरे, खुद को और दूसरों को नुकसान पहुँचाने वाले तरीके से काम करना होश में नहीं है। और सिर्फ़ अपनी इच्छाओं के हिसाब से काम करने की वजह से ही हम बेहोश होते हैं। जो होश में होता है, वह अपनी इच्छाओं को अपने विचारों, भावनाओं और कामों पर हावी नहीं होने देता। इसके बजाय, वह अभी जो जानता है, उसके आधार पर अपने लिए सबसे अच्छे ऑप्शन चुनता है। आपके आस-पास के लोगों का एक आम सर्वे जल्दी ही बता देगा कि बिना सोचे-समझे काम करना आम बात है। समझदारी, जन्मजात इच्छाओं और इच्छाओं के आगे पीछे रह जाती है। सचेत होने का तरीका है जागरू...