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जानें कि सुबह खाली पेट क्या खाना चाहिए और क्या नहीं

 क्या आप उठते ही चाय या कॉफ़ी पीते हैं? क्या आपको अक्सर इनडाइजेशन, गैस, थकान या लो एनर्जी महसूस होती है? इसका कारण आपका सुबह का पहला खाना हो सकता है। आयुर्वेद के अनुसार, सुबह का पहला खाना खाली पेट खाने से पूरे दिन आपकी एनर्जी, डाइजेशन, मेटाबॉलिज्म और इम्यूनिटी पर असर पड़ता है। इस वीडियो में जानें कि खाली पेट क्या खाना चाहिए और क्या नहीं, साथ ही 5 आयुर्वेदिक फूड्स जो नेचुरली शरीर को साफ करते हैं, डाइजेशन को मजबूत करते हैं और पूरे दिन एनर्जी बनाए रखते हैं। साथ ही, उन 3 आम गलतियों के बारे में जानें जो ज्यादातर लोग सुबह करते हैं जिससे धीरे-धीरे हेल्थ प्रॉब्लम होने लगती हैं। अगर आप बेहतर डाइजेशन, वेट कंट्रोल, मजबूत इम्यूनिटी, नेचुरल डिटॉक्स और एनर्जेटिक सुबह चाहते हैं, तो यह वीडियो आपके लिए जरूरी है। आसान आयुर्वेदिक नियमों को फॉलो करके आप आसानी से अपने डेली रूटीन को हेल्दी बना सकते हैं। अपने दिन की शुरुआत आयुर्वेदिक तरीके से करें और अपने शरीर, मन और डेली परफॉर्मेंस में फर्क महसूस करें। सुबह खाली पेट क्या खाना चाहिए? आयुर्वेद के अनुसार, सही सुबह की डाइट पाचन, मेटाबॉलिज्म, इम्यूनिटी और डे...

रोज की थकान और सुस्ती को कहें अलविदा

  रोज की थकान का सबसे बड़ा कारण होता है शरीर में पोषण की कमी और कमजोर पाचन. जब शरीर को सही पोषक तत्व नहीं मिलते तो वो जल्दी थक जाता है. आयुर्वेद में कुछ देसी चीजों के सही मेल को शरीर के लिए अमृत समान माना गया है. ये उपाय कमजोरी दूर करने के साथ ही पाचन, इम्युनिटी और स्टैमिना को भी बेहतर बनाता है. नियमित सेवन से शरीर में एनर्जी बनी रहती है और सुस्ती धीरे धीरे कम होने लगती है. दादी नानी के जमाने से चला आ रहा ये आयुर्वेदिक उपाय आज भी उतना ही असरदार माना जाता है जो शरीर को अंदर से ताकत देने का काम करता है. बेहद फायदेमंद आयुर्वेद में दूध और छुहारे का मेल "बल्य" माना गया है, इसके सेवन से शरीर की गर्मी बनी रहती है, मांसपेशियों को ताकत मिलती है और लंबे समय तक कमजोरी की शिकायत कम होने लगती है. जो लोग जल्दी थक जाते हैं या जिन्हें दिन के बीच में नींद आने लगती है उनके लिए ये काफी फायदेमंद माना जाता है. दुध और छुहारा शरीर को तुरंत ऊर्जा देने के साथ साथ धीरे धीरे अंदरूनी मजबूती भी बढ़ाता है. इसमें मौजूद प्राकृतिक गुण शरी को पोषण देते हैं जिससे दिनभर एक्टिव रहने में मदद मिलती है. खास बात ये ...

अखरोट vs बादाम: ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल के लिए कौन सा ड्राई फ्रूट बेहतर है

  अखरोट और बादाम दोनों ही आपके स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छे हैं क्योंकि इनमें ओमेगा-3 (एएलए) भरपूर मात्रा में होता है, जो एलडीएल या खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है। दोनों ही मेवे पर्याप्त मोनोअनसैचुरेटेड वसा और मैग्नीशियम भी प्रदान करते हैं, जो आपके हृदय को ठीक से काम करते रखते हैं। हालांकि इनका सेवन अपने हृदय स्वास्थ्य लक्ष्यों के अनुसार करना महत्वपूर्ण है। सभी नट्स हृदय के लिए सर्वोत्तम स्वास्थ्यवर्धक खाद्य पदार्थों में से हैं क्योंकि वे आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करते हैं जो इंफ्लेमेशन को कम करते हैं, कोलेस्ट्रॉल को घटाते हैं और आपके समग्र हृदय स्वास्थ्य में सुधार करते हैं। दोनों ही मेवे विटामिन ई, मैग्नीशियम, पोटेशियम और फाइबर जैसे एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर माने जाते हैं। अखरोट दिल की सेहत के लिए कैसे अच्छे हैं अखरोट हृदय स्वास्थ्य के लिए सबसे स्वास्थ्यप्रद नट्स में से हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, वे ओमेगा-3 फैटी एसिड के सर्वोत्तम स्रोत हैं, जो सूजन को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अखरोट लगभग 2.5 ग्राम एएलए के साथ पॉलीफेनोल्स से भरपूर होते हैं, जो ऑक्सीडेटिव तनाव...

कान्हा शांति वनम, हैदराबाद: एक शानदार मेडिटेशन रिसोर्ट

  हैदराबाद से लगभग 50 किलोमीटर दूर स्थित कान्हा शांति वनम भारत के सबसे प्रतिष्ठित और सुव्यवस्थित मेडिटेशन रिसोर्ट्स में से एक है। यह स्थान न केवल आध्यात्मिक साधना का केंद्र है, बल्कि आधुनिक जीवनशैली से थके हुए मनुष्य के लिए शांति, संतुलन और आत्मिक जागरण का एक आदर्श आश्रय भी है। यह केंद्र हार्टफुलनेस आंदोलन से संबद्ध है और विश्वप्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु पूज्य दाजी (कमलेश डी. पटेल) के मार्गदर्शन में संचालित होता है। कान्हा शांति वनम लगभग 1,400 एकड़ में फैला हुआ एक हरित, शांत और सुव्यवस्थित परिसर है। यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता—हरी-भरी पहाड़ियाँ, खुले मैदान, वृक्षों की कतारें और स्वच्छ वातावरण—मन को तुरंत शांत कर देती हैं। इस स्थान की योजना इस प्रकार की गई है कि साधक प्रकृति के सान्निध्य में रहकर ध्यान और आत्मचिंतन कर सके। यहाँ का वातावरण पूर्णतः प्रदूषण-मुक्त और अनुशासित है, जो ध्यान साधना के लिए अत्यंत अनुकूल माना जाता है।कान्हा शांति वनम का वातावरण अत्यंत शांत, हरित और प्राकृतिक है। विस्तृत भू-भाग में फैले इस परिसर में घने वृक्ष, सुंदर उद्यान, जल-संरचनाएँ और खुले ध्यान स्थल हैं, ज...

रीढ़ का दर्द बीमारी नहीं है | कमर दर्द का असली कारण जो किसी ने नहीं बताया

  कमर का दर्द, रीढ़ की जकड़न, बार-बार होने वाली पीठ की समस्या… क्या आपने कभी सोचा है कि दवा लेने के बाद भी दर्द क्यों लौट आता है? यह वीडियो किसी चमत्कार, व्यायाम या झूठे वादे की बात नहीं करता। यह वीडियो उस सच्चाई को खोलता है जिसे लोग सालों से गलत समझते आए हैं। इस वीडियो में आप जानेंगे: रीढ़ वास्तव में क्या है दर्द हड्डी में क्यों नहीं होता नसों का तनाव कैसे कमर को कठोर बना देता है सूजन शरीर की दुश्मन क्यों नहीं होती और क्यों असली समाधान बाहर नहीं, जीवन की लय में छिपा होता है यह कोई धार्मिक भाषण नहीं है। यह कोई ध्यान या चेतना की चर्चा नहीं है। यह शरीर की वास्तविक प्रक्रिया को समझने की ईमानदार कोशिश है। अगर आप: बार-बार कमर दर्द से परेशान हैं रिपोर्ट सामान्य होने के बाद भी दर्द झेल रहे हैं या सिर्फ शरीर को समझना चाहते हैं तो यह वीडियो आपके लिए है। वीडियो को अंत तक देखें, क्योंकि यह दर्द से लड़ना नहीं, दर्द को समझना सिखाता है।

‘भजन क्लबिंग’ - युवाओं में एक नया ट्रेंड

आजकल युवाओं में ‘भजन क्लबिंग’ का एक नया ट्रेंड ज़ोर पकड़ रहा है. यहां क्या होता है और जेन ज़ी के बीच ये क्यों पॉपुलर हो रहा है, देखिए बी बी सी न्यूज़ की  इस रिपोर्ट में. ------------------------------ रिपोर्ट: अदिति शर्मा शूट और एडिट: अरीबा अंसारी विषय: भजन क्लबिंग — परिचयात्मक टिप्पणी भजन क्लबिंग एक नवाचारी और समकालीन सांस्कृतिक-आध्यात्मिक अवधारणा है, जिसमें परंपरागत भजन गायन को आधुनिक सामूहिक सहभागिता, मंचीय प्रस्तुति और सामाजिक संवाद के साथ जोड़ा जाता है। यह केवल एक धार्मिक या संगीतात्मक गतिविधि नहीं है, बल्कि सामूहिक चेतना, भावनात्मक एकता और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का सशक्त माध्यम बनकर उभर रही है। भजन क्लबिंग का उद्देश्य भक्ति संगीत को सीमित धार्मिक दायरों से निकालकर व्यापक समाज, विशेषकर युवाओं, तक सहज और आकर्षक रूप में पहुँचाना है। परंपरागत रूप से भजन व्यक्तिगत साधना, मंदिरों या धार्मिक आयोजनों तक सीमित रहे हैं। किंतु समय के साथ जीवनशैली, रुचियों और संचार माध्यमों में आए परिवर्तन ने भक्ति की अभिव्यक्ति के स्वरूप को भी प्रभावित किया है। भजन क्लबिंग इसी परिवर्तनशील संदर्भ की उ...

जल्दी खाने की आदत बिगाड़ रही है पाचन? लिवर हो रहा खराब! - जानिए क्या कहते हैं डॉक्टर कैसे और कितना खाना खाएं

  आज की बिगड़ी हुई और बिजी लाइफस्टाइल में खाना सिर्फ भूख मिटाने का साधन नहीं रहा बल्कि स्ट्रेस, टाइम की कमी और आदतों से जुड़ गया है. लोग बिजी रहने के कारण या तो जल्दी-जल्दी खा लेते हैं या फिर मार्केट से कुछ भी लेकर खा लेते हैं. ऐसे में उन्हें ये तक पता नहीं चल पाता कि वो कैसा खा रहे हैं और कितना खा रहे हैं. दरअसल, जल्दी-जल्दी खाना या फिर जरूरत से अधिक खाना जैसी चीजें फैटी लिवर, मोटापा और पाचन से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ाता है. ऐसे में लिवर स्पेशलिस्ट ने एक इंटरव्यू में बताया है कि इंसान को कितना और कैसे खाना चाहिए ताकि शरीर और लिवर दोनों स्वस्थ रह सकें. खाना खाते समय जल्दी करना आज की सबसे आम लेकिन सबसे अनदेखी की जाने वाली आदतों में से एक है। गरमा-गरम खाना सामने आते ही लोग बिना सोचे-समझे उसे निगल लेते हैं और बाद में गैस, पेट दर्द, ब्लोटिंग या भारीपन से परेशान होते हैं। UK के जाने-माने सर्जन और हेल्थ कंटेंट क्रिएटर Dr Karan Rajan के अनुसार, खराब पाचन की जड़ अक्सर पेट नहीं, बल्कि हमारी खाने की आदत होती है- खासतौर पर ठीक से ना चबाना। डॉक्टर बताते हैं कि पाचन की प्रक्रिया पेट में नहीं...