सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

सदी की सबसे बेहतरीन किताब - मार्कस ऑरेलियस पुस्तक सारांश हिंदी में, ध्यान



यह पश्चिमी दुनिया में सबसे ज्यादा पढ़ी जाने वाली पुस्तकों में से एक है।
इस विडिओ में  जीवन को कैसे जीएं, और कैसे हर परिस्थिति में बेहतर तरह से जीया जा सकता है इसकी महत्वपूर्ण प्रस्तुति हैं.

1. हमारा कन्ट्रोल सिर्फ हमारे दिमाग पर है , बाहर की घटनाओं और लोगो पे नहीं।   समस्याएँ मन में उत्पन्न होती हैं, घटनाओं को कष्टदायक मानने की हमारी धारणा ही हमारे द्वारा अनुभव किए जाने वाले किसी भी दुख का वास्तविक स्रोत है, न कि स्वयं घटनाएँ।मार्कस का मानना ​​था कि एक व्यक्ति अपने मन से किसी भी परेशान करने वाले प्रभाव को तुरंत मिटा सकता है और शांति से रह सकता है।"कार्य में बाधा ही कार्य को आगे बढ़ाती है।जो बाधा बनती है, वही मार्ग बन जाती है।"*मार्कस सिखाते हैं कि हमारा मन एक ऐसी चीज़ है जो खुद को पूरी तरह से नियंत्रित करता है और दुनिया से अलग है; यह घटनाओं से तब तक प्रभावित नहीं हो सकता जब तक कि यह खुद को प्रभावित न करे। प्रत्येक आभास मन की इच्छा के अनुसार होता है और हमारे मन में अपार शक्ति होती है। हम चुन सकते हैं कि हम घटनाओं को कैसे देखते हैं और हम अपने विचारों और कार्यों पर पूरी तरह से नियंत्रण रखते हैं। आपको केवल वही दर्द सहना पड़ता है जो आप खुद पर थोपते हैं।पीड़ा तभी शुरू होती है जब आप उसे होने देते हैं, मुझे एक कहावत बहुत पसंद है:----"हर मिनट जब आप गुस्से में होते हैं, तो आप खुशी के साठ सेकंड खो देते हैं।" - राल्फ वाल्डो इमर्सन - आप उन साठ सेकंडों को हँसते हुए, बातें करते हुए, साँस लेते हुए, जीते हुए बिता सकते थे।आप ये पल हँसते हुए भी बिता सकते थे, आपने रोना चुना आपकी मर्जी से ,आप चाहे किसी भी दर्द से गुज़र रहे हों, आपके पास एक विकल्प है। आप उसे स्वीकार कर सकते हैं और बिना शिकायत किए आगे बढ़ सकते हैं। हमेशा।

2.असली अमीरी वस्तुओं में नहीं एक मजबूत दिमाग में है। न्यूनतम में जीओ लक्जरी व् आराम हमे कमजोर बना देते हैं,एक सुखी जीवन जीने के लिए बहुत कम चीजों की जरुरत होती है।  

3. लेटिन कहावत है - मोमेरो मोरी - याद रखो तुम्हे मरना है -मौत से डरो मत उसे अपना गुरु बनाओ।    समय सीमित है ,उसे व्यर्थ मत करो।ज़िंदगी शिकायत करने में एक पल भी बर्बाद करने के लिए बहुत छोटी है। आपको कभी नहीं पता कि आपके पास कितना समय है। कोई नहीं जानता। हो सकता है कि कल आपको कोई समस्या हो  जाए, या अगले दिन आप कभी जाग ही न पाएँ। धरती पर आपका समय सीमित है। बहुत सीमित। इसलिए इसे बर्बाद मत करो। 

4. ब्रह्मांड परिवर्तनशील है---हमारे संसार का यही नियम है ,इसे स्वीकार करो, सब कुछ प्रति पल बदल रहा है , रिश्तों को पकड़ो मत , लोग व् परिस्थिति कभी भी बदल सकती है , जो खो गया वो बदलाव है। 

5. प्रसिद्धि और इच्छाएँ हासिल करने लायक नहीं हैं, महानता का पीछा करो ,तुच्छ चीजों का नहीं ,हर काम भलाई के लिए करो , अपने स्वार्थ से उठकर कर्म करो नाम के लिए नहीं 
मार्कस बार-बार समझाते हैं कि प्रसिद्धि और प्रशंसा की चाहत क्यों मूर्खतापूर्ण है और हमें इस बात की परवाह क्यों नहीं करनी चाहिए कि हमारे मरने के बाद दूसरे हमारे बारे में क्या सोचते हैं।वह बताते हैं कि इतने सारे प्रसिद्ध लोगों को भुला दिया गया है कि जो लोग मरणोपरांत उनकी प्रशंसा करेंगे, वे स्वयं जल्द ही मर जाएँगे।वह समझाते हैं कि कोई भी कर्म अमर नहीं होता:यह सोचो कि जैसे रेत के ढेर एक-दूसरे पर जमा होकर पुरानी रेत को छिपा लेते हैं, वैसे ही जीवन में पहले की घटनाएँ बाद की घटनाओं से जल्द ही ढक जाती हैं।"प्रसिद्धि, चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो, हमेशा गुमनामी में खो जाती है और उसकी चाहत केवल व्यक्ति के अहंकार को दर्शाती है।

6. "तर्क" का सही अर्थ हमेशा कोई अर्थपूर्ण होना ज़रूरी नहीं है - बल्कि इसका हमेशा कोई उद्देश्य होगा।यह समस्त जीवन का सार है और दुनिया में होने वाली हर चीज़ की अंतर्निहित मास्टर प्लान है।इसलिए, जो कुछ भी होता है, चाहे वह अच्छा हो या बुरा, किसी न किसी कारण से होता है।

7.बुरे लोगों से लड़ो मत ,लोग बुरे हैं क्यों कि वे अज्ञानी हैं।  वो नफरत नहीं , करुणा के पात्र हैं।  किसी और की बुराई को अपनी अच्छाई पर हावी मत होने दो।

8.विक्टिम मत बनो , मेरे साथ ऐसा क्यों होता है ,नाकामी का दोष हालात पर, दूसरों पर ,या किस्मत पर मत डालो।  खुद को एक हीरो की तरह देखो ,जो चुनौतियों से लड़ रहा है, बेचारे की तरह नहीं जो दुनिया के थपेड़े खा रहा है।  

                                                          ---------------------------------

अगर आपने कभी सोचा है कि बिल क्लिंटन की पसंदीदा किताब कौन सी है, तो अब आपको पता चल गया है। रोमन सम्राट मार्कस ऑरेलियस की "मेडिटेशन्स" शायद कभी प्रकाशित होने वाली नहीं थी, लेकिन 1558 में जर्मनी के हीडलबर्ग विश्वविद्यालय में किसी ने फैसला किया कि ज्ञान से भरपूर ये 12 किताबें इतनी मूल्यवान हैं कि उन्हें दुनिया से छिपाया नहीं जा सकता - और उन्होंने इन्हें छाप दिया।

प्राचीन यूनानी स्टोइकिज़्म, जिस पर मार्कस ऑरेलियस ने अपनी रचनाएँ आधारित की हैं, आपको भी प्रभावित करेगा।स्टोइज़्म एक हेलेनिस्टिक दर्शन है जो प्राचीन ग्रीस और रोम में फला-फूला।हेलेनिस्टिक दर्शन प्राचीन यूनानी दर्शन है जो प्राचीन ग्रीस के हेलेनिस्टिक काल से संबंधित है, जो 323 ईसा पूर्व में सिकंदर महान की मृत्यु से लेकर 31 ईसा पूर्व में एक्टियम के युद्ध तक फैला था। इस काल के प्रमुख संप्रदाय स्टोइक, एपिकुरियन और संशयवादी थे।

मार्कस ऑरेलियस ने कोइन ग्रीक में मेडिटेशन की 12 पुस्तकें लिखीं[1] ताकि वे अपने मार्गदर्शन और आत्म-सुधार के स्रोत बन सकें। यह संभव है कि इस रचना का एक बड़ा हिस्सा सिरमियम में लिखा गया हो, जहाँ उन्होंने 170-180 ईस्वी में सैन्य अभियानों की योजना बनाने में काफ़ी समय बिताया था। इस रचना का एक बड़ा हिस्सा उन्होंने अपने युद्ध अभियानों के समय लिखा 

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

विश्व ध्यान दिवस - 21 दिसम्बर

  विश्व ध्यान दिवस - एक विश्व, एक हृदय 21 दिसम्बर, 2025 को 20 मिनट के निर्देशित हार्टफुलनेस ध्यान के लिए विश्व भर में लाखों लोगों से जुड़ें। क्या आप जानते हैं?  विश्व ध्यान दिवस पर दुनिया के सभी धर्मों  व् विचारों के  लाखों लोग अपने घर से ही  यू ट्यूब के माध्यम से एक साथ जुड़ रहे हैं , आप भी इस में सम्मलित होने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर रजिस्टर करें व् विश्व में शांति व्  स्वास्थ्य लाभ को प्रसारित करने के महत कार्य में अपना योगदान दें।  नि:शुल्क पंजीकरण करे -  अभी https://hfn.link/meditation आधुनिक जीवनशैली में भागदौड़, तनाव, अनियमित दिनचर्या और मानसिक दबाव ने मनुष्य के शारीरिक स्वास्थ्य पर गहरा नकारात्मक प्रभाव डाला है। ऐसे समय में ध्यान (Meditation) एक प्राचीन लेकिन अत्यंत प्रभावी साधना के रूप में उभरकर सामने आया है। ध्यान केवल मानसिक शांति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संपूर्ण शारीरिक स्वास्थ्य को भी सुदृढ़ करता है। वैज्ञानिक शोधों ने सिद्ध किया है कि नियमित ध्यान अभ्यास से शरीर की अनेक प्रणालियाँ बेहतर ढंग से कार्य करने लगती हैं। ध्यान का अर्थ और...

हार्टफुलनेस ध्यान

  ध्यान का अनुभव करें हार्ट फुलनेस ध्यान सीखने के लिए क्लिक करें हार्टफुलनेस ध्यान एक वैश्विक उपस्थिति वाली ध्यान परंपरा है जो साधकों को कुछ सरल अभ्यासों के माध्यम से  मानवीय चेतना की उत्कृष्टता का अनुभव करने में सक्षम बनाती है। हार्टफुलनेस पर वैज्ञानिक अध्ययनों ने मनुष्यों पर इसके प्रभावों का अन्वेषण शुरू कर दिया है । हार्टफुलनेस ध्यान  के प्रभाव की हमारी समझ को और गहराई से बढ़ाने के लिए, इस परंपरा के विभिन्न अभ्यासों का स्पष्ट विवरण आवश्यक है, साथ ही उस दर्शन को भी समझना होगा जिस पर ये अभ्यास आधारित हैं। अब तक, अधिकांश शोध ध्यान  प्रभावों पर केंद्रित रहे हैं, और अधिकांशतः उस दर्शन या परंपरा पर विचार नहीं किया गया है जिससे ये ध्यान अभ्यास उत्पन्न होते हैं। आध्यात्मिक ध्यान अभ्यासों की सच्ची वैज्ञानिक समझ के लिए इस दर्शन को स्वीकार करना आवश्यक है, साथ ही उन तंत्रिका-शरीर क्रिया संबंधी सहसंबंधों और मानसिक अवस्थाओं को भी समझना आवश्यक है जिनसे वे जुड़े हो सकते हैं। वास्तव में, हार्टफुलनेस अभ्यासों का विकास योगिक अनुसंधान और आध्यात्मिक गुरुओं एवं उनके सहय...

अपने मन को कंट्रोल करना

  क्या जान-बूझकर ज़िंदगी के ज़्यादा अच्छे अनुभव बनाना मुमकिन है? ज़्यादातर लोगों को ज़िंदगी के कुछ ही अच्छे अनुभव इसलिए मिलते हैं क्योंकि वे लगभग पूरी तरह से बेहोश होते हैं। वे ऑटोमैटिक, सबकॉन्शियस प्रोग्राम पर काम कर रहे होते हैं जो बैकग्राउंड में चुपचाप चलते रहते हैं, उनके हर कदम को तय करते हैं, उनके इमोशनल तार खींचते हैं, उनकी सोच को चुनते हैं, और उनके अनुभवों को पिछली चोटों, डर और इनसिक्योरिटी के हिसाब से बनाते हैं। मज़े की बात यह है कि उन्हें लगता है कि वे होश में हैं। पागलपन भरे, खुद को और दूसरों को नुकसान पहुँचाने वाले तरीके से काम करना होश में नहीं है। और सिर्फ़ अपनी इच्छाओं के हिसाब से काम करने की वजह से ही हम बेहोश होते हैं। जो होश में होता है, वह अपनी इच्छाओं को अपने विचारों, भावनाओं और कामों पर हावी नहीं होने देता। इसके बजाय, वह अभी जो जानता है, उसके आधार पर अपने लिए सबसे अच्छे ऑप्शन चुनता है। आपके आस-पास के लोगों का एक आम सर्वे जल्दी ही बता देगा कि बिना सोचे-समझे काम करना आम बात है। समझदारी, जन्मजात इच्छाओं और इच्छाओं के आगे पीछे रह जाती है। सचेत होने का तरीका है जागरू...