सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

किस विटामिन की कमी से शरीर में होने लगती है नसों की बीमारी? इसके लिए कौन सी दाल खाएं ?

 




किस विटामिन की कमी से हो सकती है नसों की बीमारी

नसों यानी तंत्रिकाओं से जुड़ी बीमारियों के पीछे कई बार विटामिन बी 12 की कमी हो सकती है। दरअसल, विटामिन बी12 तंत्रिकाओं की कोशिकाओं के लिए बेहद जरूरी है, जो तंत्रिकाओं को डैमेज होने से बचाती है और साथ ही डैमेज हुई तंत्रिकाओं को फिर से जल्द से जल्द रिपेयर होने में मदद करती है।

अगर शरीर में विटामिन बी12 की कमी हो गई है, तो शरीर तंत्रिका तंत्र यानी नर्वस सिस्टम में हो रहे डैमेज को रिपेयर प्रभावी रूप से नहीं कर पाता है और यहां तक कि कई बार स्थायी क्षति भी हो जाती है। इसके कारण तंत्रिका तंत्र से जुड़े रोग जैसे पेरिफरल न्यूरोपैथी, याददाश्त से जुड़ी समस्याएं और साइकोसिस। इसके अलावा विटामिन बी12 की कमी के कारण एनीमिया जैसी समस्याएं होने का खतरा भी बढ़ जाता है।

समय पर सही खाद्य पदार्थों का सेवन करना हमारे शरीर को स्वस्थ रखने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है। खाना सिर्फ भूख मिटाने के लिए नहीं होता है, बल्कि इससे मौजूद पोषक तत्व जो हमारे शरीर को मिलते हैं वे सबसे जरूरी होते हैं। इसलिए डॉक्टर हमेशा अच्छे और हेल्दी खाद्य पदार्थों का सेवन की सलाह देते हैं। अच्छे खाद्य पदार्थों में अलग-अलग तरह के पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर के अलग-अलग अंगों व कार्यों के लिए जरूरी होते हैं। विटामिन भी शरीर के सबसे जरूरी पोषक तत्वों में से एक हैं और शरीर में इनकी कमी होना कई बार शरीर में किसी स्थायी क्षति का कारण बन सकती है।

विटामिन बी 12 की कमी के लक्षण

वैसे तो हर व्यक्ति के शरीर में विटामिन बी12 की कमी होने से अलग-अलग तरह के लक्षण देखे जा सकते हैं और यह भी देखा गया है कि कई बार लोगों को शुरुआत में विटामिन बी12 की कमी से किसी तरह के लक्षण महसूस नहीं होते हैं। लेकिन कुछ लक्षण हैं, जिन्हें लंबे समय तक इग्नोर नहीं करना चाहिए -

  • पाचन में गड़बड़ी
  • दिनभर थकान रहना
  • शरीर का कोई हिस्सा सुन्न रहना
  • शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी
  • बार-बार मुंह में छाले पड़ना
  • भूख न लगना

कौन सी दाल से मिलेगा विटामिन बी12

शरीर में विटामिन बी12 की कमी-पूर्ति करना बेहद जरूरी है और अगर आप वेजिटेरियन डाइट फॉलो करते हैं, तो मूंग दाल का सेवन करना काफी अच्छा विकल्प हो सकता है। मूंग दाल में अच्छी मात्रा में विटामिन बी12 पाया जाता है और यह शरीर में अवशोषित भी अच्छे से हो जाता है।

इसके साथ-साथ मूंग दाल में फाइबर व प्रोटीन जैसी अन्य जरूरी पोषक तत्व भी मिलते हैं, जो शरीर के लिए बेहद फायदेमंद माना जाते हैं। प्रोटीन हमारे शरीर की हेल्दी मसल ग्रोथ को बढ़ावा देता है और वहीं फाइबर पाचन क्रिया को अच्छा बनाए रखता है और मोटापे जैसी बीमारियों के खतरे को कम करता है

किन बातों का रखें ध्यान

शरीर में किसी भी पोषक तत्व की कमी होना किसी न किसी शारीरिक समस्या को ही बढ़ावा देती है। इसलिए आपके लिए यह बहुत जरूरी है कि आप तीनों समय हेल्दी खाना ही खाएं, जिसमें आपको अलग-अलग प्रकार के पोषक तत्व मिलें। अच्छे खानपान के साथ-साथ अपने शरीर को एक्टिव रखना भी जरूरी है, ताकि आपका शरीर सामान्य रूप से शरीर के जरूरी पोषक तत्वों को पचा सके।



टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

विश्व ध्यान दिवस - 21 दिसम्बर

  विश्व ध्यान दिवस - एक विश्व, एक हृदय 21 दिसम्बर, 2025 को 20 मिनट के निर्देशित हार्टफुलनेस ध्यान के लिए विश्व भर में लाखों लोगों से जुड़ें। क्या आप जानते हैं?  विश्व ध्यान दिवस पर दुनिया के सभी धर्मों  व् विचारों के  लाखों लोग अपने घर से ही  यू ट्यूब के माध्यम से एक साथ जुड़ रहे हैं , आप भी इस में सम्मलित होने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर रजिस्टर करें व् विश्व में शांति व्  स्वास्थ्य लाभ को प्रसारित करने के महत कार्य में अपना योगदान दें।  नि:शुल्क पंजीकरण करे -  अभी https://hfn.link/meditation आधुनिक जीवनशैली में भागदौड़, तनाव, अनियमित दिनचर्या और मानसिक दबाव ने मनुष्य के शारीरिक स्वास्थ्य पर गहरा नकारात्मक प्रभाव डाला है। ऐसे समय में ध्यान (Meditation) एक प्राचीन लेकिन अत्यंत प्रभावी साधना के रूप में उभरकर सामने आया है। ध्यान केवल मानसिक शांति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संपूर्ण शारीरिक स्वास्थ्य को भी सुदृढ़ करता है। वैज्ञानिक शोधों ने सिद्ध किया है कि नियमित ध्यान अभ्यास से शरीर की अनेक प्रणालियाँ बेहतर ढंग से कार्य करने लगती हैं। ध्यान का अर्थ और...

हार्टफुलनेस ध्यान

  ध्यान का अनुभव करें हार्ट फुलनेस ध्यान सीखने के लिए क्लिक करें हार्टफुलनेस ध्यान एक वैश्विक उपस्थिति वाली ध्यान परंपरा है जो साधकों को कुछ सरल अभ्यासों के माध्यम से  मानवीय चेतना की उत्कृष्टता का अनुभव करने में सक्षम बनाती है। हार्टफुलनेस पर वैज्ञानिक अध्ययनों ने मनुष्यों पर इसके प्रभावों का अन्वेषण शुरू कर दिया है । हार्टफुलनेस ध्यान  के प्रभाव की हमारी समझ को और गहराई से बढ़ाने के लिए, इस परंपरा के विभिन्न अभ्यासों का स्पष्ट विवरण आवश्यक है, साथ ही उस दर्शन को भी समझना होगा जिस पर ये अभ्यास आधारित हैं। अब तक, अधिकांश शोध ध्यान  प्रभावों पर केंद्रित रहे हैं, और अधिकांशतः उस दर्शन या परंपरा पर विचार नहीं किया गया है जिससे ये ध्यान अभ्यास उत्पन्न होते हैं। आध्यात्मिक ध्यान अभ्यासों की सच्ची वैज्ञानिक समझ के लिए इस दर्शन को स्वीकार करना आवश्यक है, साथ ही उन तंत्रिका-शरीर क्रिया संबंधी सहसंबंधों और मानसिक अवस्थाओं को भी समझना आवश्यक है जिनसे वे जुड़े हो सकते हैं। वास्तव में, हार्टफुलनेस अभ्यासों का विकास योगिक अनुसंधान और आध्यात्मिक गुरुओं एवं उनके सहय...

अपने मन को कंट्रोल करना

  क्या जान-बूझकर ज़िंदगी के ज़्यादा अच्छे अनुभव बनाना मुमकिन है? ज़्यादातर लोगों को ज़िंदगी के कुछ ही अच्छे अनुभव इसलिए मिलते हैं क्योंकि वे लगभग पूरी तरह से बेहोश होते हैं। वे ऑटोमैटिक, सबकॉन्शियस प्रोग्राम पर काम कर रहे होते हैं जो बैकग्राउंड में चुपचाप चलते रहते हैं, उनके हर कदम को तय करते हैं, उनके इमोशनल तार खींचते हैं, उनकी सोच को चुनते हैं, और उनके अनुभवों को पिछली चोटों, डर और इनसिक्योरिटी के हिसाब से बनाते हैं। मज़े की बात यह है कि उन्हें लगता है कि वे होश में हैं। पागलपन भरे, खुद को और दूसरों को नुकसान पहुँचाने वाले तरीके से काम करना होश में नहीं है। और सिर्फ़ अपनी इच्छाओं के हिसाब से काम करने की वजह से ही हम बेहोश होते हैं। जो होश में होता है, वह अपनी इच्छाओं को अपने विचारों, भावनाओं और कामों पर हावी नहीं होने देता। इसके बजाय, वह अभी जो जानता है, उसके आधार पर अपने लिए सबसे अच्छे ऑप्शन चुनता है। आपके आस-पास के लोगों का एक आम सर्वे जल्दी ही बता देगा कि बिना सोचे-समझे काम करना आम बात है। समझदारी, जन्मजात इच्छाओं और इच्छाओं के आगे पीछे रह जाती है। सचेत होने का तरीका है जागरू...