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ये इन्तहा थी

मैं था - मेरा जूनून था - और था - इश्के रूहानी , तू कंहाँ था - कंहाँ तेरी फ़िक्र - कंहाँ थी तेरी कहानी , फिर तब - क्यों तेरी तब्बसुम - एक आगोश में बदली , बस सिर्फ़ तू था -- तेरी फिकर- और बस तेरी कहानी , मुस्कराहटें - और सरगोश्याँ - खामोशियाँ ये तो पहचानी , न पहचानी तो मेरी अक्ल- फरके मज़ाजो इश्के रूहानी , न तू था - न मैं था - था तो बस एक वजूद ---------- ये इन्तहा थी - या इश्क था - या थी बस एक हैरानी .