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70 की उम्र में 20 की फुर्ती---- ताई ची - Tai Chi -

  ताई ची (Tai Chi) चीन की एक प्राचीन शारीरिक एवं मानसिक अभ्यास-पद्धति है, जिसकी जड़ें पारंपरिक चीनी मार्शल आर्ट और चीनी दर्शन में हैं। इसे सामान्यतः धीमी, नियंत्रित और निरंतर गतियों , गहरी साँसों तथा मानसिक एकाग्रता के संयोजन के रूप में किया जाता है। आज ताई ची का अभ्यास केवल मार्शल आर्ट के रूप में नहीं, बल्कि शारीरिक फिटनेस, संतुलन, तनाव कम करने और मानसिक शांति के लिए भी किया जाता है। ताई ची में शरीर को अचानक या तेज गति से नहीं चलाया जाता। इसकी अधिकांश मुद्राएँ धीरे-धीरे एक मुद्रा से दूसरी मुद्रा में प्रवाहित होती हैं। अभ्यास के दौरान व्यक्ति अपने शरीर की स्थिति, साँस और गति पर ध्यान केंद्रित करता है। यही कारण है कि इसे कभी-कभी “चलता हुआ ध्यान” (Moving Meditation) भी कहा जाता है। ताई ची की सरल और धीमी गतियाँ अक्सर आसानी से सीखी जा सकती हैं।शरीर और मन के बीच समन्वय इसका महत्वपूर्ण आधार है। ताई ची के अभ्यास में सामान्यतः पैर जमीन पर स्थिर रखे जाते हैं और शरीर का भार एक पैर से दूसरे पैर पर नियंत्रित तरीके से स्थानांतरित किया जाता है। हाथों और भुजाओं की गोलाकार एवं प्रवाहपूर्ण गतियाँ...

जीवन को जैसा है, वैसा अपनाने की कला

उपरोक्त वीडियो बेथ केम्पटन की Wabi Sabi केवल जापानी दर्शन पर लिखी गई पुस्तक पर नहीं है; यह आधुनिक मनुष्य को अपने जीवन को देखने का एक नया चश्मा देती है। लेखिका वाबी-साबी को किसी जटिल दार्शनिक सिद्धांत या जापानी संस्कृति की दूर की अवधारणा बनाकर प्रस्तुत नहीं करतीं। उनकी दृष्टि में यह एक ऐसी जीवन-दृष्टि है जिसे हम अपने रोज़मर्रा के जीवन, संबंधों, काम, घर, प्रकृति और स्वयं के प्रति अपने व्यवहार में उतार सकते हैं। केम्पटन का लेखकीय दृष्टिकोण मूलतः स्वीकार करने की कला पर आधारित है। आधुनिक जीवन में हम लगातार अपने अनुभवों को सुधारने, परिस्थितियों को नियंत्रित करने और स्वयं को बेहतर बनाने में लगे रहते हैं। हमें लगता है कि जब सब कुछ हमारी इच्छा के अनुरूप हो जाएगा, तभी हमें संतोष मिलेगा। लेकिन लेखिका इस धारणा पर प्रश्न उठाती हैं। उनके लिए जीवन की सुंदरता उसकी पूर्णता में नहीं, बल्कि उसकी अपूर्णता, परिवर्तनशीलता और अनिश्चितता में भी मौजूद है। यही वह बिंदु है जहाँ बेथ केम्पटन की लेखन-दृष्टि विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो जाती है। वह पाठक को यह नहीं समझातीं कि जीवन की कठिनाइयों को नज़रअंदाज़ कर सकारात...

जानें कि सुबह खाली पेट क्या खाना चाहिए और क्या नहीं

 क्या आप उठते ही चाय या कॉफ़ी पीते हैं? क्या आपको अक्सर इनडाइजेशन, गैस, थकान या लो एनर्जी महसूस होती है? इसका कारण आपका सुबह का पहला खाना हो सकता है। आयुर्वेद के अनुसार, सुबह का पहला खाना खाली पेट खाने से पूरे दिन आपकी एनर्जी, डाइजेशन, मेटाबॉलिज्म और इम्यूनिटी पर असर पड़ता है। इस वीडियो में जानें कि खाली पेट क्या खाना चाहिए और क्या नहीं, साथ ही 5 आयुर्वेदिक फूड्स जो नेचुरली शरीर को साफ करते हैं, डाइजेशन को मजबूत करते हैं और पूरे दिन एनर्जी बनाए रखते हैं। साथ ही, उन 3 आम गलतियों के बारे में जानें जो ज्यादातर लोग सुबह करते हैं जिससे धीरे-धीरे हेल्थ प्रॉब्लम होने लगती हैं। अगर आप बेहतर डाइजेशन, वेट कंट्रोल, मजबूत इम्यूनिटी, नेचुरल डिटॉक्स और एनर्जेटिक सुबह चाहते हैं, तो यह वीडियो आपके लिए जरूरी है। आसान आयुर्वेदिक नियमों को फॉलो करके आप आसानी से अपने डेली रूटीन को हेल्दी बना सकते हैं। अपने दिन की शुरुआत आयुर्वेदिक तरीके से करें और अपने शरीर, मन और डेली परफॉर्मेंस में फर्क महसूस करें। सुबह खाली पेट क्या खाना चाहिए? आयुर्वेद के अनुसार, सही सुबह की डाइट पाचन, मेटाबॉलिज्म, इम्यूनिटी और डे...

रोज की थकान और सुस्ती को कहें अलविदा

  रोज की थकान का सबसे बड़ा कारण होता है शरीर में पोषण की कमी और कमजोर पाचन. जब शरीर को सही पोषक तत्व नहीं मिलते तो वो जल्दी थक जाता है. आयुर्वेद में कुछ देसी चीजों के सही मेल को शरीर के लिए अमृत समान माना गया है. ये उपाय कमजोरी दूर करने के साथ ही पाचन, इम्युनिटी और स्टैमिना को भी बेहतर बनाता है. नियमित सेवन से शरीर में एनर्जी बनी रहती है और सुस्ती धीरे धीरे कम होने लगती है. दादी नानी के जमाने से चला आ रहा ये आयुर्वेदिक उपाय आज भी उतना ही असरदार माना जाता है जो शरीर को अंदर से ताकत देने का काम करता है. बेहद फायदेमंद आयुर्वेद में दूध और छुहारे का मेल "बल्य" माना गया है, इसके सेवन से शरीर की गर्मी बनी रहती है, मांसपेशियों को ताकत मिलती है और लंबे समय तक कमजोरी की शिकायत कम होने लगती है. जो लोग जल्दी थक जाते हैं या जिन्हें दिन के बीच में नींद आने लगती है उनके लिए ये काफी फायदेमंद माना जाता है. दुध और छुहारा शरीर को तुरंत ऊर्जा देने के साथ साथ धीरे धीरे अंदरूनी मजबूती भी बढ़ाता है. इसमें मौजूद प्राकृतिक गुण शरी को पोषण देते हैं जिससे दिनभर एक्टिव रहने में मदद मिलती है. खास बात ये ...

अखरोट vs बादाम: ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल के लिए कौन सा ड्राई फ्रूट बेहतर है

  अखरोट और बादाम दोनों ही आपके स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छे हैं क्योंकि इनमें ओमेगा-3 (एएलए) भरपूर मात्रा में होता है, जो एलडीएल या खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है। दोनों ही मेवे पर्याप्त मोनोअनसैचुरेटेड वसा और मैग्नीशियम भी प्रदान करते हैं, जो आपके हृदय को ठीक से काम करते रखते हैं। हालांकि इनका सेवन अपने हृदय स्वास्थ्य लक्ष्यों के अनुसार करना महत्वपूर्ण है। सभी नट्स हृदय के लिए सर्वोत्तम स्वास्थ्यवर्धक खाद्य पदार्थों में से हैं क्योंकि वे आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करते हैं जो इंफ्लेमेशन को कम करते हैं, कोलेस्ट्रॉल को घटाते हैं और आपके समग्र हृदय स्वास्थ्य में सुधार करते हैं। दोनों ही मेवे विटामिन ई, मैग्नीशियम, पोटेशियम और फाइबर जैसे एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर माने जाते हैं। अखरोट दिल की सेहत के लिए कैसे अच्छे हैं अखरोट हृदय स्वास्थ्य के लिए सबसे स्वास्थ्यप्रद नट्स में से हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, वे ओमेगा-3 फैटी एसिड के सर्वोत्तम स्रोत हैं, जो सूजन को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अखरोट लगभग 2.5 ग्राम एएलए के साथ पॉलीफेनोल्स से भरपूर होते हैं, जो ऑक्सीडेटिव तनाव...

जल्दी खाने की आदत बिगाड़ रही है पाचन? लिवर हो रहा खराब! - जानिए क्या कहते हैं डॉक्टर कैसे और कितना खाना खाएं

  आज की बिगड़ी हुई और बिजी लाइफस्टाइल में खाना सिर्फ भूख मिटाने का साधन नहीं रहा बल्कि स्ट्रेस, टाइम की कमी और आदतों से जुड़ गया है. लोग बिजी रहने के कारण या तो जल्दी-जल्दी खा लेते हैं या फिर मार्केट से कुछ भी लेकर खा लेते हैं. ऐसे में उन्हें ये तक पता नहीं चल पाता कि वो कैसा खा रहे हैं और कितना खा रहे हैं. दरअसल, जल्दी-जल्दी खाना या फिर जरूरत से अधिक खाना जैसी चीजें फैटी लिवर, मोटापा और पाचन से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ाता है. ऐसे में लिवर स्पेशलिस्ट ने एक इंटरव्यू में बताया है कि इंसान को कितना और कैसे खाना चाहिए ताकि शरीर और लिवर दोनों स्वस्थ रह सकें. खाना खाते समय जल्दी करना आज की सबसे आम लेकिन सबसे अनदेखी की जाने वाली आदतों में से एक है। गरमा-गरम खाना सामने आते ही लोग बिना सोचे-समझे उसे निगल लेते हैं और बाद में गैस, पेट दर्द, ब्लोटिंग या भारीपन से परेशान होते हैं। UK के जाने-माने सर्जन और हेल्थ कंटेंट क्रिएटर Dr Karan Rajan के अनुसार, खराब पाचन की जड़ अक्सर पेट नहीं, बल्कि हमारी खाने की आदत होती है- खासतौर पर ठीक से ना चबाना। डॉक्टर बताते हैं कि पाचन की प्रक्रिया पेट में नहीं...

हम मृत्यु के लिए स्वयं को कैसे तैयार करें ?

  ओशो, हम मृत्यु के लिए स्वयं को कैसे तैयार करें? संग्रह मत करो।संसार में रहो, लेकिन संसार के मत बनो। किसी भी चीज़ का संग्रह मत करो — न शक्ति का, न धन का, न प्रतिष्ठा का, न पुण्य का, न ज्ञान का, यहाँ तक कि तथाकथित आध्यात्मिक अनुभवों का भी नहीं। यदि तुम संग्रह नहीं करते, तो तुम किसी भी क्षण मरने के लिए तैयार हो, क्योंकि खोने के लिए तुम्हारे पास कुछ भी नहीं है। मृत्यु का भय वास्तव में मृत्यु का भय नहीं है; मृत्यु का भय जीवन में किए गए संग्रह से पैदा होता है। तब तुम्हारे पास बहुत कुछ होता है जिसे तुम खो सकते हो। तुम उससे चिपक जाते हो। यही जीसस के इस कथन का अर्थ है: “धन्य हैं वे जो आत्मा में गरीब हैं।” मैं यह नहीं कह रहा कि भिखारी बन जाओ, और न ही यह कि संसार का त्याग कर दो। मैं यह कह रहा हूँ: संसार में रहो, लेकिन संसार के मत बनो। भीतर संग्रह मत करो, आत्मा में गरीब रहो। किसी भी चीज़ के स्वामी मत बनो — तब तुम मृत्यु के लिए तैयार हो। समस्या जीवन नहीं है, समस्या है अधिकार-भाव। जितना अधिक तुम किसी चीज़ के स्वामी बनते हो, उतना ही अधिक उसे खोने का भय होता है। यदि तुम किसी भी चीज़ के स्वामी नह...

विपरीत परिस्थितियों में मन को शांत और स्थिर रखने की शक्ति - तितिक्षा

  तितिक्षा मय जीवन कैसे जीयें??? --------------------------- तितिक्षा (Titiksha) का अर्थ है -   सहनशीलता, धीरज और मानसिक दृढ़ता ,  विशेषकर सुख-दुख, सर्दी-गर्मी, मान-अपमान जैसे द्वंद्वों को बिना विलाप या शिकायत के सहन करने की क्षमता;  यह बाहरी परिस्थितियों के बावजूद मन को शांत और स्थिर रखने की आध्यात्मिक शक्ति है, जो आध्यात्मिक उन्नति के लिए आवश्यक मानी जाती है।   मुख्य बिंदु: सहनशक्ति:   यह सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक सहनशक्ति भी है, जो कष्टों के प्रति प्रतिक्रिया किए बिना उन्हें स्वीकार करती है।   द्वंद्वों को सहना:   इसमें सर्दी, गर्मी, सुख, दुख, लाभ, हानि, मान, अपमान जैसे जीवन के सभी विरोधाभासी अनुभवों को स्वीकार करना शामिल है।   आध्यात्मिक महत्व:   आदि शंकराचार्य और स्वामी विवेकानंद जैसे विचारकों ने इसे आत्म-ज्ञान और योग के मार्ग में एक महत्वपूर्ण योग्यता बताया है, जो मन को बाहरी प्रभावों से मुक्त करती है।   शांत प्रतिक्रिया:   तितिक्षा का मतलब उदासीनता नहीं, बल्कि यह सिखाती है कि मन को आंतरिक रूप से शांत ...

सर्दियों में खजूर क्यों खाना चाहिए - सर्दियों में खजूर कैसे खाएं

  अक्सर लोग पूछते हैं कि सर्दियों  में खजूर क्यों खाना चाहिए। दरअसल खजूर की तासीर गर्म होती है, जो ठंड के मौसम में शरीर का तापमान बनाए रखने में मदद करती है। वैज्ञानिक तौर पर खजूर में मौजूद कार्बोहाइड्रेट और मिनरल्स शरीर को तुरंत एनर्जी देते हैं। यही वजह है कि सर्दियों में खजूर खाने से ठंड कम लगती है और कमजोरी महसूस नहीं होती।  सर्दियों का मौसम आते ही शरीर को ज्यादा गर्माहट और एनर्जी की जरूरत महसूस होने लगती है। ठंड में जल्दी थकान होना, हाथ-पैर ठंडे रहना या कमजोरी लगना आम बात है। ऐसे में खजूर एक ऐसा ड्राई फ्रूट है, जो बिना किसी दवा के शरीर को अंदर से मजबूत बनाता है। खजूर में नेचुरल शुगर, आयरन, फाइबर और जरूरी मिनरल्स होते हैं, जो सर्दियों में शरीर को एक्टिव रखते हैं।  खजूर खाने के फायदे सिर्फ एनर्जी तक सीमित नहीं हैं। इसमें मौजूद फाइबर पाचन को दुरुस्त रखता है और कब्ज की समस्या से राहत देता है। आयरन खून की कमी को दूर करने में मदद करता है। साथ ही खजूर में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट्स सर्दियों में होने वाले इंफेक्शन से शरीर की सुरक्षा करते हैं और इम्यूनिटी को मजबूत बनाते...

नट्स में भी मिलावट केमिकल का खतरा - बादाम, अखरोट, काजू में ऐसे पहचानें

  बादाम, काजू और अखरोट ऐसे नट्स हैं जिन्हें न सिर्फ लोग केक से लेकर डेजर्ट में यूज करते हैं, बल्कि डेली डाइट में भी शामिल करते हैं. रोजाना सुबह खाली पेट भीगे अखरोट और बादाम खाते हैं, क्योंकि ये हेल्दी फैट्स और कई विटामिन, अमीनो एसिड्स का सोर्स होते हैं. नियमित रूप से नट्स को अपनी डाइट का हिस्सा बनाने से न सिर्फ इम्यूनिटी बूस्ट होती है, बल्कि हार्ट, ब्रेन को भी फायदा मिलता है. इससे बाल, त्वचा भी हेल्दी रहती है साथ ही सुबह नट्स खाने से एनर्जी भी बढ़ती है, लेकिन अब इनमें भी मिलावट बहुत नॉर्मल हो गई है जैसे खराब गुणवत्ता के नट्स मिलना, केमिकल वाली सिंथेटिक पॉलिश. लंबे समय तक अगर इस तरह के नट्स खाए जाएं तो ये लिवर-किडनी को नुकसान भी पहुंचता है. आप मार्केट से जो काजू-बादाम या अखरोट खरीद रहे हैं उसमें मिलावट है या नहीं इसको पता करने के कुछ सिंपल से टिप्स हैं जिनको आप फॉलो कर सकते हैं. इसके अलावा हमेशा अच्छे ब्रांड से ही ये चीजें खरीदना बेहतर माना जाता है. तो चलिए जान लेते हैं नट्स में की गई मिलावट कैसे पहचानें. काजू में मिलावट कैसे पहचानें? अक्सर काजू में सस्ती क्वालिटी के काजू मिला दिए ज...

डांस – अच्छी हेल्थ- फिटनेस- स्ट्रेस मैनेज करें

  जिसने भी यह कहा कि डांस कोई स्टाइल नहीं, बल्कि जीने का एक तरीका है, वह शायद हमारे समय के ट्रेंड के बारे में बता रहा था। दुनिया तेज़ी से डांस को अपना रही है, सिर्फ़ डांस फ़्लोर पर नाचने या शादी में नाचने से कहीं ज़्यादा। चाहे हमारे क्लासिकल डांस फॉर्म हों या उनके वेस्टर्न काउंटरपार्ट, डांसिंग खुश, ज़िंदादिल और एक्साइटेड महसूस करने के बारे में है; सोई हुई एनर्जी को जगाने के बारे में है; मन, शरीर और आत्मा का ध्यान रखने के बारे में है। डांस इंस्ट्रक्टर श्यामक डावर कहते हैं, “डांस डी-स्ट्रेस करता है।” “यह आपको हेल्दी रखता है, आपको बेहतर फोकस करने में मदद करता है, और आपको खुश रखता है।” जब कोई डांस करता है, तो वह अपने मन, शरीर और आत्मा पर पूरी तरह से कंट्रोल रखता है। “आजकल, 13 साल के टीनएजर और 70 साल और उससे ज़्यादा उम्र के सिल्वर सिटिज़न डांस सीख रहे हैं। उनके लिए, यह लोगों से मिलने-जुलने, वज़न कम करने और बॉडी पोस्चर को ठीक करने का मौका है। कई बहुत शर्मीली युवा लड़कियों ने डांस के ज़रिए खुलकर बात की है और कॉन्फिडेंस हासिल किया है। कपल्स ने एक साथ डांस करके अपने खराब होते रिश्तों को फिर...