सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

2026 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

विश्व का सबसे बड़ा डॉक्टर आपका Brain हैं

  'द ब्रेन दैट चेंजेज इटसेल्फ' का सार। यह वीडियो न्यूरोप्लास्टिसिटी की अद्भुत शक्ति को उजागर करता है, जो दिमाग को किसी भी उम्र में रिप्रोग्राम करने की क्षमता प्रदान करती है। वैज्ञानिक सिद्धांतों और प्रेरक कहानियों के माध्यम से जानें कि कैसे आदतों को बदलकर नई मानसिक वायरिंग विकसित की जा सकती है। ‘The Brain That Changes Itself’ न्यूरोसाइंटिस्ट और मनोचिकित्सक नॉर्मन डॉइज की प्रसिद्ध पुस्तक है। इस पुस्तक का मुख्य विचार है कि मानव मस्तिष्क स्थिर और अपरिवर्तनीय नहीं है, बल्कि अनुभव, अभ्यास, सीखने और वातावरण के अनुसार स्वयं को बदल सकता है। इस क्षमता को न्यूरोप्लास्टिसिटी (Neuroplasticity) कहा जाता है। लंबे समय तक वैज्ञानिकों का मानना था कि वयस्क मस्तिष्क की संरचना लगभग निश्चित होती है और यदि मस्तिष्क का कोई हिस्सा क्षतिग्रस्त हो जाए तो उसकी क्षमताएँ स्थायी रूप से समाप्त हो जाती हैं। डॉइज अपनी पुस्तक में अनेक वास्तविक मरीजों और वैज्ञानिक प्रयोगों के माध्यम से बताते हैं कि यह धारणा अधूरी थी। मस्तिष्क में नई तंत्रिका-सम्बन्धी संरचनाएँ और रास्ते विकसित हो सकते हैं तथा मस्तिष्क के दूसर...

अपनी लाइफ से फ़ालतू काम हटाओ ----- हमारे जीवन में सबसे महत्वपूर्ण क्या है?”

  Greg McKeown की पुस्तक Essentialism: The Disciplined Pursuit of Less का मूल विचार बहुत सरल लेकिन शक्तिशाली है— जीवन में हर चीज़ महत्वपूर्ण नहीं होती। इसलिए हमें यह तय करना चाहिए कि वास्तव में क्या महत्वपूर्ण है और बाकी चीज़ों को साहसपूर्वक हटाना चाहिए। McKeown के अनुसार आधुनिक जीवन में हमारी सबसे बड़ी समस्या काम की कमी नहीं, बल्कि बहुत अधिक विकल्प और प्रतिबद्धताएँ हैं। हम दूसरों की अपेक्षाओं, सामाजिक दबाव, काम, परिवार और लगातार आने वाली सूचनाओं के कारण इतने व्यस्त हो जाते हैं कि महत्वपूर्ण चीज़ों के लिए समय और ऊर्जा नहीं बचती। Essentialism का अर्थ आलस्य या कम काम करना नहीं है। इसका अर्थ है कम लेकिन सही काम करना —ऐसे काम जो हमारे जीवन के सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्यों में वास्तविक योगदान देते हैं। 1. “Less but Better” — कम, लेकिन बेहतर Essentialist व्यक्ति लगातार यह प्रश्न पूछता है: “मेरे लिए वास्तव में सबसे महत्वपूर्ण क्या है?” हर अवसर को स्वीकार करने के बजाय वह कुछ चुनिंदा अवसरों पर ध्यान देता है। McKeown कहते हैं कि जब हम हर चीज़ को महत्वपूर्ण मानते हैं, तो वास्तव में कुछ भी महत्...

पेट की गैस और कब्ज़ जड़ से खत्म | जो दवाई नहीं कर सकती, वह यह करेगा

  इस वीडियो में ओशो ने बताया है कि हमारे पाचन तंत्र को हमारा मन किस प्रकार प्रभावित करता है। डर, चिंता, तनाव और निराशा हमारी गट हेल्थ (पेट की सेहत) पर कैसे असर डालते हैं,    अब मॉडर्न मेडिकल साइंस ने दिमाग और पाचन तंत्र के बीच एक खास कनेक्शन का पता लगाया है, जिसे अक्सर **गट-ब्रेन एक्सिस** कहा जाता है। यह दोतरफा कम्युनिकेशन नेटवर्क बताता है कि हमारी भावनाएं सीधे हमारी पाचन सेहत पर कैसे असर डालती हैं। डर, लगातार चिंता, लंबे समय तक रहने वाला तनाव और निराशा सिर्फ़ दिमाग तक ही सीमित नहीं रहते—ये शरीर में कई तरह के बदलाव लाते हैं जो पेट और आंतों पर गहरा असर डाल सकते हैं। जब कोई व्यक्ति डर या तनाव महसूस करता है, तो शरीर अपना "फाइट-ऑर-फ्लाइट" (लड़ो या भागो) रिस्पॉन्स एक्टिवेट करता है। कोर्टिसोल और एड्रेनालाईन जैसे स्ट्रेस हार्मोन खून में रिलीज होते हैं। हालांकि यह रिस्पॉन्स इमरजेंसी के समय मददगार होता है, लेकिन लंबे समय तक एक्टिव रहने से सामान्य पाचन प्रक्रिया में रुकावट आ सकती है। पाचन अंगों से खून का बहाव मांसपेशियों और दिमाग की तरफ मुड़ जाता है, जिससे पाचन धीमा हो जाता है...

क्या भगवान प्रार्थनाओं का उत्तर देते हैं ?

यह वीडियो इस गहरे सवाल का उत्तर खोजने का प्रयास करता है कि क्या भगवान प्रार्थनाओं का उत्तर देते हैं? प्रार्थना का स्वरूप: प्रार्थना केवल शब्दों का समूह नहीं है, यह स्वीकार करना है कि हम सब कुछ अकेले नहीं कर सकते प्रार्थनाओं का उत्तर कैसे मिलता है: क्या भगवान प्रार्थनाओं का उत्तर देते हैं—यह प्रश्न आस्था, अनुभव और दर्शन से जुड़ा हुआ है। अलग-अलग परंपराएँ इस पर भिन्न दृष्टिकोण प्रस्तुत करती हैं।दर्शनशास्त्र यह भी कहता है कि प्रार्थना का वास्तविक उद्देश्य बाहरी दुनिया को बदलना नहीं,कुछ लोग यह मानते हैं कि हर प्रार्थना का उत्तर “हाँ” नहीं होता; कभी “नहीं” या “अभी नहीं” भी उत्तर हो सकता है,अंततः, यह प्रश्न व्यक्ति की आस्था, आत्मचिंतन का साधन। यह वीडियो इस गहरे सवाल का उत्तर खोजने का प्रयास करता है कि क्या भगवान प्रार्थनाओं का उत्तर देते हैं?

लिवर को साइलेंटली क‍िल कर रहे ये 3 फूड्स - डॉ. ने बताया लिवर के लिए सबसे खराब चीजें कौन सी हैं

Liver Health: लिवर को साइलेंटली क‍िल कर रहे ये 3 फूड्स, डॉ. ने बताया लिवर के लिए सबसे खराब चीजें कौन सी हैं   3 Foods That Are Bad For Your Liver: AIIMS, हार्वर्ड और स्टैनफोर्ड से ट्रेंड गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. के अनुसार आप रोजमरा की ज़िंदगी में आप 3 ऐसे फूड्स खा रहे हैं, जो आपके लिवर को बीमार नही और बीमार कर रहे हैं, जानना चाहते हैं कौन से हैं वो 3 फूड्स?  3 Foods That Are Bad For Your Liver:  लिवर हमारी बॉडी का वो ज़रूरी अंग है, जो शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकालने में मदद करता है. ऐसे में खुद को बीमारियों से दूर रखने के लिए इसका सही रहना बेहद जरूरी है, लेकिन क्या आप जानते हैं AIIMS, हार्वर्ड और स्टैनफोर्ड से ट्रेंड गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. के अनुसार आप रोज़मर्रा की ज़िंदगी में 3 ऐसे फूड्स खा रहे हैं, जो आपके लिवर को सेहतमंद नहीं बल्कि बीमार कर रहे हैं, जानना चाहते हैं कौन से हैं वो 3 फूड्स? स्टोरी में बने रहिए.  लिवर के लिए सबसे खराब खाना कौन सा होता है? शुगरी ड्रिंक्स:   ये ड्रिंक्स लिवर के लिए एक लिक्विड ज़हर की तरह काम करती हैं, सोडा, पै...

जानें कि सुबह खाली पेट क्या खाना चाहिए और क्या नहीं

 क्या आप उठते ही चाय या कॉफ़ी पीते हैं? क्या आपको अक्सर इनडाइजेशन, गैस, थकान या लो एनर्जी महसूस होती है? इसका कारण आपका सुबह का पहला खाना हो सकता है। आयुर्वेद के अनुसार, सुबह का पहला खाना खाली पेट खाने से पूरे दिन आपकी एनर्जी, डाइजेशन, मेटाबॉलिज्म और इम्यूनिटी पर असर पड़ता है। इस वीडियो में जानें कि खाली पेट क्या खाना चाहिए और क्या नहीं, साथ ही 5 आयुर्वेदिक फूड्स जो नेचुरली शरीर को साफ करते हैं, डाइजेशन को मजबूत करते हैं और पूरे दिन एनर्जी बनाए रखते हैं। साथ ही, उन 3 आम गलतियों के बारे में जानें जो ज्यादातर लोग सुबह करते हैं जिससे धीरे-धीरे हेल्थ प्रॉब्लम होने लगती हैं। अगर आप बेहतर डाइजेशन, वेट कंट्रोल, मजबूत इम्यूनिटी, नेचुरल डिटॉक्स और एनर्जेटिक सुबह चाहते हैं, तो यह वीडियो आपके लिए जरूरी है। आसान आयुर्वेदिक नियमों को फॉलो करके आप आसानी से अपने डेली रूटीन को हेल्दी बना सकते हैं। अपने दिन की शुरुआत आयुर्वेदिक तरीके से करें और अपने शरीर, मन और डेली परफॉर्मेंस में फर्क महसूस करें। सुबह खाली पेट क्या खाना चाहिए? आयुर्वेद के अनुसार, सही सुबह की डाइट पाचन, मेटाबॉलिज्म, इम्यूनिटी और डे...

रोज की थकान और सुस्ती को कहें अलविदा

  रोज की थकान का सबसे बड़ा कारण होता है शरीर में पोषण की कमी और कमजोर पाचन. जब शरीर को सही पोषक तत्व नहीं मिलते तो वो जल्दी थक जाता है. आयुर्वेद में कुछ देसी चीजों के सही मेल को शरीर के लिए अमृत समान माना गया है. ये उपाय कमजोरी दूर करने के साथ ही पाचन, इम्युनिटी और स्टैमिना को भी बेहतर बनाता है. नियमित सेवन से शरीर में एनर्जी बनी रहती है और सुस्ती धीरे धीरे कम होने लगती है. दादी नानी के जमाने से चला आ रहा ये आयुर्वेदिक उपाय आज भी उतना ही असरदार माना जाता है जो शरीर को अंदर से ताकत देने का काम करता है. बेहद फायदेमंद आयुर्वेद में दूध और छुहारे का मेल "बल्य" माना गया है, इसके सेवन से शरीर की गर्मी बनी रहती है, मांसपेशियों को ताकत मिलती है और लंबे समय तक कमजोरी की शिकायत कम होने लगती है. जो लोग जल्दी थक जाते हैं या जिन्हें दिन के बीच में नींद आने लगती है उनके लिए ये काफी फायदेमंद माना जाता है. दुध और छुहारा शरीर को तुरंत ऊर्जा देने के साथ साथ धीरे धीरे अंदरूनी मजबूती भी बढ़ाता है. इसमें मौजूद प्राकृतिक गुण शरी को पोषण देते हैं जिससे दिनभर एक्टिव रहने में मदद मिलती है. खास बात ये ...

अखरोट vs बादाम: ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल के लिए कौन सा ड्राई फ्रूट बेहतर है

  अखरोट और बादाम दोनों ही आपके स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छे हैं क्योंकि इनमें ओमेगा-3 (एएलए) भरपूर मात्रा में होता है, जो एलडीएल या खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है। दोनों ही मेवे पर्याप्त मोनोअनसैचुरेटेड वसा और मैग्नीशियम भी प्रदान करते हैं, जो आपके हृदय को ठीक से काम करते रखते हैं। हालांकि इनका सेवन अपने हृदय स्वास्थ्य लक्ष्यों के अनुसार करना महत्वपूर्ण है। सभी नट्स हृदय के लिए सर्वोत्तम स्वास्थ्यवर्धक खाद्य पदार्थों में से हैं क्योंकि वे आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करते हैं जो इंफ्लेमेशन को कम करते हैं, कोलेस्ट्रॉल को घटाते हैं और आपके समग्र हृदय स्वास्थ्य में सुधार करते हैं। दोनों ही मेवे विटामिन ई, मैग्नीशियम, पोटेशियम और फाइबर जैसे एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर माने जाते हैं। अखरोट दिल की सेहत के लिए कैसे अच्छे हैं अखरोट हृदय स्वास्थ्य के लिए सबसे स्वास्थ्यप्रद नट्स में से हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, वे ओमेगा-3 फैटी एसिड के सर्वोत्तम स्रोत हैं, जो सूजन को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अखरोट लगभग 2.5 ग्राम एएलए के साथ पॉलीफेनोल्स से भरपूर होते हैं, जो ऑक्सीडेटिव तनाव...

कान्हा शांति वनम, हैदराबाद: एक शानदार मेडिटेशन रिसोर्ट

  हैदराबाद से लगभग 50 किलोमीटर दूर स्थित कान्हा शांति वनम भारत के सबसे प्रतिष्ठित और सुव्यवस्थित मेडिटेशन रिसोर्ट्स में से एक है। यह स्थान न केवल आध्यात्मिक साधना का केंद्र है, बल्कि आधुनिक जीवनशैली से थके हुए मनुष्य के लिए शांति, संतुलन और आत्मिक जागरण का एक आदर्श आश्रय भी है। यह केंद्र हार्टफुलनेस आंदोलन से संबद्ध है और विश्वप्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु पूज्य दाजी (कमलेश डी. पटेल) के मार्गदर्शन में संचालित होता है। कान्हा शांति वनम लगभग 1,400 एकड़ में फैला हुआ एक हरित, शांत और सुव्यवस्थित परिसर है। यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता—हरी-भरी पहाड़ियाँ, खुले मैदान, वृक्षों की कतारें और स्वच्छ वातावरण—मन को तुरंत शांत कर देती हैं। इस स्थान की योजना इस प्रकार की गई है कि साधक प्रकृति के सान्निध्य में रहकर ध्यान और आत्मचिंतन कर सके। यहाँ का वातावरण पूर्णतः प्रदूषण-मुक्त और अनुशासित है, जो ध्यान साधना के लिए अत्यंत अनुकूल माना जाता है।कान्हा शांति वनम का वातावरण अत्यंत शांत, हरित और प्राकृतिक है। विस्तृत भू-भाग में फैले इस परिसर में घने वृक्ष, सुंदर उद्यान, जल-संरचनाएँ और खुले ध्यान स्थल हैं, ज...

रीढ़ का दर्द बीमारी नहीं है | कमर दर्द का असली कारण जो किसी ने नहीं बताया

  कमर का दर्द, रीढ़ की जकड़न, बार-बार होने वाली पीठ की समस्या… क्या आपने कभी सोचा है कि दवा लेने के बाद भी दर्द क्यों लौट आता है? यह वीडियो किसी चमत्कार, व्यायाम या झूठे वादे की बात नहीं करता। यह वीडियो उस सच्चाई को खोलता है जिसे लोग सालों से गलत समझते आए हैं। इस वीडियो में आप जानेंगे: रीढ़ वास्तव में क्या है दर्द हड्डी में क्यों नहीं होता नसों का तनाव कैसे कमर को कठोर बना देता है सूजन शरीर की दुश्मन क्यों नहीं होती और क्यों असली समाधान बाहर नहीं, जीवन की लय में छिपा होता है यह कोई धार्मिक भाषण नहीं है। यह कोई ध्यान या चेतना की चर्चा नहीं है। यह शरीर की वास्तविक प्रक्रिया को समझने की ईमानदार कोशिश है। अगर आप: बार-बार कमर दर्द से परेशान हैं रिपोर्ट सामान्य होने के बाद भी दर्द झेल रहे हैं या सिर्फ शरीर को समझना चाहते हैं तो यह वीडियो आपके लिए है। वीडियो को अंत तक देखें, क्योंकि यह दर्द से लड़ना नहीं, दर्द को समझना सिखाता है।

‘भजन क्लबिंग’ - युवाओं में एक नया ट्रेंड

आजकल युवाओं में ‘भजन क्लबिंग’ का एक नया ट्रेंड ज़ोर पकड़ रहा है. यहां क्या होता है और जेन ज़ी के बीच ये क्यों पॉपुलर हो रहा है, देखिए बी बी सी न्यूज़ की  इस रिपोर्ट में. ------------------------------ रिपोर्ट: अदिति शर्मा शूट और एडिट: अरीबा अंसारी विषय: भजन क्लबिंग — परिचयात्मक टिप्पणी भजन क्लबिंग एक नवाचारी और समकालीन सांस्कृतिक-आध्यात्मिक अवधारणा है, जिसमें परंपरागत भजन गायन को आधुनिक सामूहिक सहभागिता, मंचीय प्रस्तुति और सामाजिक संवाद के साथ जोड़ा जाता है। यह केवल एक धार्मिक या संगीतात्मक गतिविधि नहीं है, बल्कि सामूहिक चेतना, भावनात्मक एकता और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का सशक्त माध्यम बनकर उभर रही है। भजन क्लबिंग का उद्देश्य भक्ति संगीत को सीमित धार्मिक दायरों से निकालकर व्यापक समाज, विशेषकर युवाओं, तक सहज और आकर्षक रूप में पहुँचाना है। परंपरागत रूप से भजन व्यक्तिगत साधना, मंदिरों या धार्मिक आयोजनों तक सीमित रहे हैं। किंतु समय के साथ जीवनशैली, रुचियों और संचार माध्यमों में आए परिवर्तन ने भक्ति की अभिव्यक्ति के स्वरूप को भी प्रभावित किया है। भजन क्लबिंग इसी परिवर्तनशील संदर्भ की उ...

जल्दी खाने की आदत बिगाड़ रही है पाचन? लिवर हो रहा खराब! - जानिए क्या कहते हैं डॉक्टर कैसे और कितना खाना खाएं

  आज की बिगड़ी हुई और बिजी लाइफस्टाइल में खाना सिर्फ भूख मिटाने का साधन नहीं रहा बल्कि स्ट्रेस, टाइम की कमी और आदतों से जुड़ गया है. लोग बिजी रहने के कारण या तो जल्दी-जल्दी खा लेते हैं या फिर मार्केट से कुछ भी लेकर खा लेते हैं. ऐसे में उन्हें ये तक पता नहीं चल पाता कि वो कैसा खा रहे हैं और कितना खा रहे हैं. दरअसल, जल्दी-जल्दी खाना या फिर जरूरत से अधिक खाना जैसी चीजें फैटी लिवर, मोटापा और पाचन से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ाता है. ऐसे में लिवर स्पेशलिस्ट ने एक इंटरव्यू में बताया है कि इंसान को कितना और कैसे खाना चाहिए ताकि शरीर और लिवर दोनों स्वस्थ रह सकें. खाना खाते समय जल्दी करना आज की सबसे आम लेकिन सबसे अनदेखी की जाने वाली आदतों में से एक है। गरमा-गरम खाना सामने आते ही लोग बिना सोचे-समझे उसे निगल लेते हैं और बाद में गैस, पेट दर्द, ब्लोटिंग या भारीपन से परेशान होते हैं। UK के जाने-माने सर्जन और हेल्थ कंटेंट क्रिएटर Dr Karan Rajan के अनुसार, खराब पाचन की जड़ अक्सर पेट नहीं, बल्कि हमारी खाने की आदत होती है- खासतौर पर ठीक से ना चबाना। डॉक्टर बताते हैं कि पाचन की प्रक्रिया पेट में नहीं...

दुनिया के सबसे महान चिकित्सक ड्यूटी पर

  मैंने MRI स्कैन देखा और मेरे शरीर में एक सिहरन दौड़ गई। यह मौत का फरमान था, जो काले और सफेद अक्षरों में छपा था। इस हॉस्पिटल में लोग मुझे लेजेंड कहते हैं। मैं डॉ. जेम्स मिलर हूँ, रिटायर्ड चीफ ऑफ वैस्कुलर सर्जरी। मैंने चालीस साल इंसानी शरीर के अंदर बिताए हैं। मैं शिकागो की सड़कों से ज़्यादा अपनी धमनियों का नक्शा जानता हूँ। मैंने धड़कते हुए दिल अपनी हथेलियों में पकड़े हैं और अनगिनत शरीरों से बेलगाम बहते खून को कंट्रोल किया है। लेकिन उस स्कैन को देखकर, दशकों में पहली बार, मुझे सर्जन जैसा महसूस नहीं हुआ, मुझे लगा जैसे मुझे कुछ नहीं आता। . मरीज का नाम सारा था। वह छब्बीस साल की थी, एक सिंगल मदर जो सिर्फ़ घर का खर्च चलाने के लिए एक होटल में डबल शिफ्ट में काम करती थी। कॉफी डालते समय वह गिर गई थी। उसके दिमाग में एन्यूरिज्म सिर्फ़ बड़ा नहीं था; किसी राक्षस जैसा बड़ा था। वह उसके ब्रेन स्टेम की सबसे नाजुक संरचनाओं के चारों ओर एक अजगर की तरह लिपटा हुआ था। . "यह ऑपरेशन करने लायक नहीं है, मिलर," न्यूरोलॉजी के चीफ ने अपना सिर हिलाते हुए मुझसे कहा। "अगर तुम ऑपरेशन करते हो, तो टेबल पर ही ...

सर्दियों में गलती से भी मत कर देना ये गलतियां, वरना खराब हो जाएगी किडनी की हेल्थ

  सर्दियों के मौसम में कुछ स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बढ़ जाती हैं. खासकर किडनी के मरीजों के लिए यह मौसम परेशानियों से जुड़ा रहता है. किडनी हमारे शरीर के लिए अहम अंग है. यह शरीर से हानिकारक तत्व और अतिरिक्त पानी बाहर निकालती है और हमारे खून को साफ रखती है. सर्दियों में कम पानी पीना, खराब खानपान, या शरीर की कम एक्टिविटी से किडनी पर ज्यादा दबाव पड़ सकता है और यह कई समस्याओं का कारण बन सकता है. ऐसे में सर्दियों के दौरान किडनी की देखभाल करना बेहद जरूरी है. सर्दियों में क्या होती है दिक्कत? सर्दियों में सबसे बड़ी समस्या यह होती है कि लोग कम पानी पीते हैं. ठंड के कारण अक्सर प्यास कम लगती है और लोग सोचते हैं कि पानी पीने की जरूरत नहीं है, लेकिन यह सोच बिल्कुल गलत है. किडनी को ठीक तरह से काम करने के लिए शरीर में पर्याप्त पानी होना जरूरी है. इसलिए चाहे प्यास लगे या न लगे, हर 1 से 2 घंटे में थोड़ा-थोड़ा पानी पीना चाहिए. पानी पीने से पेशाब का रंग हल्का पीला रहता है, जो शरीर में पानी की सही मात्रा का संकेत देता है. इससे किडनी पर बोझ नहीं पड़ता और स्टोन बनने का खतरा भी कम होता है. यह ऑप्शन सब...

सर्दियों में डाइजेशन से लेकर इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए ये 5 फूड्स खाएं

  सीजनल सब्जियों और फलों को खाने की सलाह तो हर कोई देता है। खासतौर पर ठंड के मौसम में जब डाइजेशन कमजोर हो जाता है और इम्यूनिटी वीक हो जाती है। जिसकी वजह से सर्दी, जुकाम, खांसी परेशान करती है। वहीं ओवरऑल हेल्थ पर भी सर्दियों का निगेटिव असर दिखने लगता है। ऐसे में आशलोक अस्पताल के डॉक्टर आलोक चोपड़ा ने हेल्दी रहने के लिए कुछ फूड्स की लिस्ट शेयर की है। जिन्हें सर्दियों के सीजन में खाना बेस्ट ऑप्शन है। सरसों का साग सर्दियों के सीजन में सरसों का साग जरूर खाएं। विटामिन ए, सी और के से भरपूर होने के साथ ही इसमे हाई फाइबर कंटेट होता है। जो डाइजेशन को स्मूद करने के साथ ही कॉन्सटिपेशन को कंट्रोल करता है और साथ ही हार्ट हेल्थ को सपोर्ट करता है। कच्ची हल्दी कच्ची फ्रेश हल्दी मार्केट में आसानी से सर्दियों में मिल जाती है। इसे अपनी रोजाना की डाइट में शामिल करें। हल्दी में पावरफुल एंटीऑक्सीडेंट होते हैं और साथ ही नेचुरल एंटी इंफ्लामेटरी भी होती है। स्किन के साथ ही इम्यूनिटी को सपोर्ट करती है और रोजाना हल्दी वाली ड्रिंक इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करेगी। खजूर सर्दियों में होने वाली थकान को दूर करने के ...

हम मृत्यु के लिए स्वयं को कैसे तैयार करें ?

  ओशो, हम मृत्यु के लिए स्वयं को कैसे तैयार करें? संग्रह मत करो।संसार में रहो, लेकिन संसार के मत बनो। किसी भी चीज़ का संग्रह मत करो — न शक्ति का, न धन का, न प्रतिष्ठा का, न पुण्य का, न ज्ञान का, यहाँ तक कि तथाकथित आध्यात्मिक अनुभवों का भी नहीं। यदि तुम संग्रह नहीं करते, तो तुम किसी भी क्षण मरने के लिए तैयार हो, क्योंकि खोने के लिए तुम्हारे पास कुछ भी नहीं है। मृत्यु का भय वास्तव में मृत्यु का भय नहीं है; मृत्यु का भय जीवन में किए गए संग्रह से पैदा होता है। तब तुम्हारे पास बहुत कुछ होता है जिसे तुम खो सकते हो। तुम उससे चिपक जाते हो। यही जीसस के इस कथन का अर्थ है: “धन्य हैं वे जो आत्मा में गरीब हैं।” मैं यह नहीं कह रहा कि भिखारी बन जाओ, और न ही यह कि संसार का त्याग कर दो। मैं यह कह रहा हूँ: संसार में रहो, लेकिन संसार के मत बनो। भीतर संग्रह मत करो, आत्मा में गरीब रहो। किसी भी चीज़ के स्वामी मत बनो — तब तुम मृत्यु के लिए तैयार हो। समस्या जीवन नहीं है, समस्या है अधिकार-भाव। जितना अधिक तुम किसी चीज़ के स्वामी बनते हो, उतना ही अधिक उसे खोने का भय होता है। यदि तुम किसी भी चीज़ के स्वामी नह...