सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

अच्छी नींद लें -- सही नींद लें

 


मानव सभ्यता के विकास में जिस चीज़ को सबसे ज़्यादा नुक़सान पहुँचा है, वह है नींद। जिस दिन से मनुष्य ने कृत्रिम प्रकाश की खोज की है, उसकी नींद बहुत ख़राब हो गई है। और जैसे-जैसे मनुष्य के हाथ में ज़्यादा से ज़्यादा उपकरण आने लगे, उसे लगने लगा कि नींद एक अनावश्यक चीज़ है, इसमें बहुत समय बर्बाद होता है। हम जिस समय सोते हैं, वह पूरी तरह से बर्बाद होता है। इसलिए जितनी कम नींद ली जा सके, उतना अच्छा है। लोगों को यह ख़याल ही नहीं आता कि जीवन की गहरी प्रक्रियाओं में नींद का कोई योगदान है। उन्हें लगता है कि सोने में बिताया गया समय बर्बाद होता है, इसलिए जितना कम सोएँ उतना अच्छा है; जितनी जल्दी वे नींद की अवधि कम कर दें, उतना ही बेहतर है।
           हमने यह ध्यान ही नहीं दिया कि मनुष्य के जीवन में प्रवेश करने वाली सभी बीमारियों, सभी विकारों का कारण नींद की कमी है। जो व्यक्ति ठीक से नहीं सो पाता, वह ठीक से जी भी नहीं सकता। नींद समय की बर्बादी नहीं है। आठ घंटे की नींद व्यर्थ नहीं जा रही है; बल्कि, उन आठ घंटों के कारण ही आप सोलह घंटे जाग पाते हैं। अन्यथा आप इतने समय तक जाग ही नहीं पाते।

उन आठ घंटों के दौरान जीवन-ऊर्जा संचित होती है, आपका जीवन पुनर्जीवित होता है, आपके मस्तिष्क और हृदय के केंद्र शांत होते हैं और आपका जीवन आपके नाभि केंद्र से कार्य करता है। उन आठ घंटों की नींद के दौरान आप फिर से प्रकृति और अस्तित्व के साथ एक हो जाते हैं। इसीलिए आप पुनर्जीवित हो जाते हैं।
         नींद को मनुष्य के जीवन में वापस लाना होगा। वास्तव में, मानवता के मानसिक स्वास्थ्य के लिए इसके अलावा कोई विकल्प, कोई और कदम नहीं है कि अगले एक-दो सौ वर्षों के लिए नींद को कानूनन अनिवार्य कर दिया जाए।
एक साधक के लिए यह बहुत ज़रूरी है कि वह ठीक से और पर्याप्त नींद ले। और एक और बात समझने की ज़रूरत है।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

विश्व ध्यान दिवस - 21 दिसम्बर

  विश्व ध्यान दिवस - एक विश्व, एक हृदय 21 दिसम्बर, 2025 को 20 मिनट के निर्देशित हार्टफुलनेस ध्यान के लिए विश्व भर में लाखों लोगों से जुड़ें। क्या आप जानते हैं?  विश्व ध्यान दिवस पर दुनिया के सभी धर्मों  व् विचारों के  लाखों लोग अपने घर से ही  यू ट्यूब के माध्यम से एक साथ जुड़ रहे हैं , आप भी इस में सम्मलित होने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर रजिस्टर करें व् विश्व में शांति व्  स्वास्थ्य लाभ को प्रसारित करने के महत कार्य में अपना योगदान दें।  नि:शुल्क पंजीकरण करे -  अभी https://hfn.link/meditation आधुनिक जीवनशैली में भागदौड़, तनाव, अनियमित दिनचर्या और मानसिक दबाव ने मनुष्य के शारीरिक स्वास्थ्य पर गहरा नकारात्मक प्रभाव डाला है। ऐसे समय में ध्यान (Meditation) एक प्राचीन लेकिन अत्यंत प्रभावी साधना के रूप में उभरकर सामने आया है। ध्यान केवल मानसिक शांति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संपूर्ण शारीरिक स्वास्थ्य को भी सुदृढ़ करता है। वैज्ञानिक शोधों ने सिद्ध किया है कि नियमित ध्यान अभ्यास से शरीर की अनेक प्रणालियाँ बेहतर ढंग से कार्य करने लगती हैं। ध्यान का अर्थ और...

हार्टफुलनेस ध्यान

  ध्यान का अनुभव करें हार्ट फुलनेस ध्यान सीखने के लिए क्लिक करें हार्टफुलनेस ध्यान एक वैश्विक उपस्थिति वाली ध्यान परंपरा है जो साधकों को कुछ सरल अभ्यासों के माध्यम से  मानवीय चेतना की उत्कृष्टता का अनुभव करने में सक्षम बनाती है। हार्टफुलनेस पर वैज्ञानिक अध्ययनों ने मनुष्यों पर इसके प्रभावों का अन्वेषण शुरू कर दिया है । हार्टफुलनेस ध्यान  के प्रभाव की हमारी समझ को और गहराई से बढ़ाने के लिए, इस परंपरा के विभिन्न अभ्यासों का स्पष्ट विवरण आवश्यक है, साथ ही उस दर्शन को भी समझना होगा जिस पर ये अभ्यास आधारित हैं। अब तक, अधिकांश शोध ध्यान  प्रभावों पर केंद्रित रहे हैं, और अधिकांशतः उस दर्शन या परंपरा पर विचार नहीं किया गया है जिससे ये ध्यान अभ्यास उत्पन्न होते हैं। आध्यात्मिक ध्यान अभ्यासों की सच्ची वैज्ञानिक समझ के लिए इस दर्शन को स्वीकार करना आवश्यक है, साथ ही उन तंत्रिका-शरीर क्रिया संबंधी सहसंबंधों और मानसिक अवस्थाओं को भी समझना आवश्यक है जिनसे वे जुड़े हो सकते हैं। वास्तव में, हार्टफुलनेस अभ्यासों का विकास योगिक अनुसंधान और आध्यात्मिक गुरुओं एवं उनके सहय...

कान्हा शांति वनम, हैदराबाद: एक शानदार मेडिटेशन रिसोर्ट

  हैदराबाद से लगभग 50 किलोमीटर दूर स्थित कान्हा शांति वनम भारत के सबसे प्रतिष्ठित और सुव्यवस्थित मेडिटेशन रिसोर्ट्स में से एक है। यह स्थान न केवल आध्यात्मिक साधना का केंद्र है, बल्कि आधुनिक जीवनशैली से थके हुए मनुष्य के लिए शांति, संतुलन और आत्मिक जागरण का एक आदर्श आश्रय भी है। यह केंद्र हार्टफुलनेस आंदोलन से संबद्ध है और विश्वप्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु पूज्य दाजी (कमलेश डी. पटेल) के मार्गदर्शन में संचालित होता है। कान्हा शांति वनम लगभग 1,400 एकड़ में फैला हुआ एक हरित, शांत और सुव्यवस्थित परिसर है। यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता—हरी-भरी पहाड़ियाँ, खुले मैदान, वृक्षों की कतारें और स्वच्छ वातावरण—मन को तुरंत शांत कर देती हैं। इस स्थान की योजना इस प्रकार की गई है कि साधक प्रकृति के सान्निध्य में रहकर ध्यान और आत्मचिंतन कर सके। यहाँ का वातावरण पूर्णतः प्रदूषण-मुक्त और अनुशासित है, जो ध्यान साधना के लिए अत्यंत अनुकूल माना जाता है।कान्हा शांति वनम का वातावरण अत्यंत शांत, हरित और प्राकृतिक है। विस्तृत भू-भाग में फैले इस परिसर में घने वृक्ष, सुंदर उद्यान, जल-संरचनाएँ और खुले ध्यान स्थल हैं, ज...